सूची न देने पर बार एसोसिएशन की संबद्धता भी समाप्त कर सकता है बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश
गोरखपुर। एफआईआर, चार्जशीट और विचाराधीन मुकदमों वाले अधिवक्ताओं की सूची बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजी जाएगी। सूची न भेजे जाने पर बार एसोसिएशन की संबद्धता भी समाप्त की जा सकती है। बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट ने अपने सदस्यों से तीन अगस्त तक आपराधिक मामलों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। पुलिस और प्रशासन से भी एसोसिएशन ने जानकारी मांगी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बार काउंसिल का रुख काफी सख्त है। इसको लेकर बार एसोसिएशन भी तेजी से कार्य कर रहा है। बार काउंसिल के सचिव ने पत्र में कहा है कि यह कार्रवाई मो. कफील बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश एवं अन्य में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन जून 2026 के आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
बार काउंसिल ने चेतावनी दी है कि यदि बार एसोसिएशन निर्धारित अवधि में सूची उपलब्ध नहीं कराता है या आदेश की अवहेलना करता है तो उसका बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से संबद्धीकरण निरस्त किया जा सकता है। साथ ही ऐसे एसोसिएशन के सदस्यों को बार काउंसिल द्वारा संचालित लाभकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा। द कमिश्नर्स कोर्ट बार एसोसिएशन गोरखपुर के अध्यक्ष सुनील मणि त्रिपाठी, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद पांडेय ने बताया कि बार काउंसिल की ओर से कोई पत्र नहीं आया है लेकिन स्वत: संज्ञान लिया गया है।
बार काउंसिल की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर सभी सदस्यों से तीन अगस्त तक अपराधिक मामलों की जानकारी मांंगी गई है। साथ ही पुलिस को भी पत्र भेजा गया है, ताकि समय से बार काउंसिल को सूची उपलब्ध कराई जा सके।
- उमापति उपाघ्याय, अघ्यक्ष, बार एसोसिएशन, सिविल कोर्ट