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Exclusive: ब्लड प्रेशर छीन रहा आंखों की रोशनी, इन महिलाओं को है ज्यादा खतरा

Mon, 25 Jul 2022 02:42 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।

सार

डॉ. राम कुमार ने बताया कि यह खतरा केवल गर्भवतियों को ही नहीं है, बल्कि बीपी के मरीजों को भी यह बीमारी हो सकती है। जिन मरीजों को शुगर के साथ बीपी है, उन्हें तो हर दो से तीन माह पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए। ऐसा न करने पर उनके आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock
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विस्तार
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ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) आंखों की रोशनी छीन रहा है। सबसे अधिक खतरा गर्भवती महिलाओं को है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रति माह ऐसे चार से पांच मरीज आ रहे हैं।

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सही समय पर आने वाले मरीजों की आंखों की रोशनी बचाई गई है, जबकि इलाज में देरी की वजह से कई मरीज दोनों आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। डॉक्टरों की भाषा में इस बीमारी को प्रीक्लैंप्सिया (प्रेग्नेंसी मैक्यूलर एडिमा) कहा जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं, नियमित बीपी जांच कराती रहें।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि प्रेग्नेंसी मैक्यूलर एडिमा, गर्भवतियों को बीपी की वजह से होता है। बीपी हाई होने पर गर्भवतियों को दौरे भी पड़ने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आंखों की नसों में सूजन आ जाती है। नसें, रक्त के अधिक स्राव की वजह से फट जाती हैं। इसके बाद अचानक दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है।
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उन्होंने बताया कि सिद्धार्थनगर जिले की रहने वाली उषा नाम की महिला आठ माह के गर्भ से थी। अचानक दर्द होने पर परिजन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में ले आए, जहां पर डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि हाई बीपी है। हाई बीपी की वजह से अचानक आंखों से खून आ गया और दोनों आंखों से दिखना बंद हो गया। जांच के बाद पता चला कि बीपी के कारण प्रीक्लैंप्सिया हैं। इस दौरान दोनों आंखों में इंजेक्शन लगाया गया और धीरे-धीरे महिला की रोशनी वापस आ गई। डॉ. राम कुमार ने बताया कि प्रीक्लैंप्सिया एक गंभीर बीमारी है। इस स्थिति में मां और बच्चे की जान को भी खतरा रहता है।

 

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बीपी के मरीजों को भी खतरा
डॉ. राम कुमार ने बताया कि यह खतरा केवल गर्भवतियों को ही नहीं है, बल्कि बीपी के मरीजों को भी यह बीमारी हो सकती है। जिन मरीजों को शुगर के साथ बीपी है, उन्हें तो हर दो से तीन माह पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए। ऐसा न करने पर उनके आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है।

प्रसव के दौरान बीपी का नियंत्रण सबसे अहम
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि प्रसव के दौरान बीपी का नियंत्रण सबसे अहम है। अगर बीपी नियंत्रित नहीं है, तो सामान्य और सिजेरियन प्रसव नहीं कराया जाता। हाई बीपी की वजह से गर्भवतियों को प्रीक्लैंप्सिया के साथ, शरीर के अन्य हिस्सों से भी खून आ जाता है। इसके अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे के मष्तिस्क पर भी इसका दुष्प्रभाव दिखता है। यही वजह है कि सलाह दी जाती है कि बीपी और शुगर की जांच समय-समय पर गर्भवती जरूर कराएं।
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