आंखों की बीमारी आई फ्लू (कंजक्टिवाइटिस) को हल्के में न लें। अगर इलाज में लापरवाही हुई तो यह खिलवाड़ महंगा पड़ सकता है। आंखों की रोशनी भी जा सकती है। लोग बिना चिकित्सीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त आई ड्राॅप का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। कई लोग इलाज में सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे हैं। कुछ लोग तो ठीक हो जाने के बाद भी बचाव में आई ड्रॉप ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसा करना सेहत के लिए खतरनाक है। इस वजह मर्ज गंभीर हो जा रही है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में आंखों के गंभीर रोगी पहुंचने लगे हैं।
एंटेरो वायरस की वजह से फैली आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस का प्रभाव पूरे पूर्वांचल में बना हुआ है। उमस भरी गर्मी और हल्की बारिश ने इस बीमारी को तेजी से फैलाया। अब यह बीमारी सोशल मीडिया और नीम-हकीमों के इलाज की वजह से बिगड़ती जा रही है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेंद्र ठाकुर बताते हैं कि ओपीडी में हर दिन आंखों के 300 से 400 मरीज आ रहे हैं। ग्रामीण इलाके के कई मरीज गंभीर अवस्था में आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह सामने आ रही है कि आंख लाल होने पर लोग घर या पड़ोस में इसी रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति की दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि हर व्यक्ति की समस्या व उसका प्रभाव अलग-अलग है। डॉक्टर आंख की लाली व पीड़ित के उम्र के हिसाब से दवा और दवा का डोज बताते हैं। जबकि, अपने मन से लोग दवा डाल रहे हैं, जिस वजह से आंखों में अधिक सूजन आ रहा है।