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बदल रहा है गोरखपुर, आप भी बदलिए: स्कूली बसें रोजाना लगाती हैं जाम, स्कूल बाहर हों तो मिले आराम

Fri, 16 Feb 2024 12:30 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

शहर की प्लानिंग करने वाले एक्सपर्ट और अफसरों की भी सलाह है कि अगर कक्षा पांच से ऊपर के बच्चों के लिए शहरी सीमा से बाहर स्कूल खुल जाएं तो बहुत हद तक जाम से राहत मिल जाएगी। बस जरूरत है सोच बदलने की, अगर ऐसा हो जाए तो जिस शहर में चलना मुश्किल होता है, वहां गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी।
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शास्त्री चौक पर जाम में फंसी स्कूली बस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चहुंओर विकास कार्यों के जाल से गोरक्षनगरी तेजी से बदली है, लेकिन जाम की समस्या अब भी बरकरार है। जाम की मुख्य वजह सड़क पर अतिक्रमण तो है ही, शहर के व्यस्त इलाकों में स्थित अस्पताल और स्कूल कम जिम्मेदार नहीं हैं। दूर तक के गांवों से बच्चों को भरकर लाने वाली करीब तीन-चार सौ बसें जब एक साथ गोलघर जैसे बाजार में घुसती हैं तो हर तरफ जाम ही जाम दिखाई देता है।

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सुबह और फिर दुपहर में लोगों के घंटों जाम में निकल जाते हैं। इन हालात में अगर अस्पतालों के साथ ही पांचवीं से ऊपर के स्कूलों को भी शहर के बाहर जीडीए की नई टाउनशिप में स्थानांतरित कर दिया जाए तो जाम की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है। इसके लिए बस सोच बदलने और सामूहिक की जरुरत है।

जानकार और शहर के प्रमुख अफसर भी मानते हैं कि ऐसा करने में कोई खास समस्या भी नहीं है। जीडीए की नई टाउनशिप में भूखंड भी उपलब्ध है। अगर ऐसा हो जाएगा तो बदल रहे गोरखपुर को एक नया आयाम मिल जाएगा।
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शहर की प्लानिंग करने वाले एक्सपर्ट और अफसरों की भी सलाह है कि अगर कक्षा पांच से ऊपर के बच्चों के लिए शहरी सीमा से बाहर स्कूल खुल जाएं तो बहुत हद तक जाम से राहत मिल जाएगी। बस जरूरत है सोच बदलने की, अगर ऐसा हो जाए तो जिस शहर में चलना मुश्किल होता है, वहां गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी।

गोलघर के आसपास सिविल लाइंस, बेतियाहाता, बक्शीपुर, दुर्गाबाड़ी आदि में कई बड़े शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं। सुबह तो जैसे तैसे काम निकल जाता है, मगर इन सभी स्कूलों में छुट्टी के समय दोपहर में दो से तीन बजे के बीच बड़ी समस्या रोजाना ही खड़ी होती है।

 

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गुरुवार को भी जाम में फंसीं स्कूल बस
बृहस्पतिवार को स्कूली बसों के जाम से पूरे गोलघर और खासकर बच्चों को जूझना पड़ा। करीब दोपहर दो बजे सूरजकुंड से गोलघर जाने के लिए निकले शिवरत्न गुप्ता जाम में फंस गए। उसी समय आसपास के स्कूलों से बच्चों को लेकर निकली स्कूली बस व ऑटो भी आ गए। किसी तरह आगे बढ़े तो गंगेज तिराहे पर जाम का सामना करना पड़ा। चौराहे पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी प्रकार मशक्कत कर वाहनों को आगे बढ़ाया।

गंगेज चौराहा से आगे बढ़ने पर हजारीपुर में स्कूल की छुट्टी होने सड़क पर ऑटो खड़ा कर बच्चों को बैठा रहे थे। इससे जाम लगा हुआ था। इसी तरह धर्मशाला बाजार में गुरुद्धारा से आगे बढ़ने पर स्कूली बस के चलते जाम मिला। सिविल लाइंस, बेतियाहाता में भी स्कूलों की छुट्टी के समय दोपहर दो से तीन के बीच जाम लग गया। एक किमी का सफर तय करने में आधा घंटे लग गए।

बोले अधिकारी
खोराबार टाउनशिप को विकसित करने की पीछे मकसद है कि शहर के अस्पताल और स्कूल वहां खुलें। इससे शहर में जाम नहीं लगेगा और मरीजों को एक जगह इलाज की सुविधा मिल जाएगी। इसी तरह स्कूल भी संचालित होने लगे तो शहरवासियों को सहूलियत होगी। पहले बड़े अस्पताल समूह के लिए भूखंड की प्लानिंग की गई। बाद में यहां के डॉक्टर व अस्पताल संचालकों का कहना था कि भूखंड छोटे हो जाएं तो वहां निवेश करेंगे। उनकी योजना के अनुसार छोटे भूखंड पर विचार किया जा रहा है। स्कूल संचालकों और डॉक्टरों से बात कर पहल की जाएगी कि वे खोराबार टाउनशिप में अस्पताल व स्कूल खोलें। खासकर, स्कूल संचालक अगर कक्षा पांच से ऊपर की कक्षाओं के लिए शहर के बाहर स्कूल स्थापित करें तो बहुत हद तक जाम से राहत मिल जाएगी।-कृष्णा करुणेश, डीएम।

यह सही है कि शहर में वाहनों की संख्या अधिक होने से जाम की समस्या सामने आ जाती है। बच्चों की छुट्टियों के समय परेशानी न होने पाए, इसके लिए अतिरिक्त यातायात पुलिस वालों की ड्यूटी भी लगाई जाती है। अगर, शहर के बाहर कक्षा पांचवीं से ऊपर के छात्रों का स्कूल और अस्पताल खुल जाएं तो शहर में जाम से राहत मिलेगी और उन लोगों को भी सहूलियत हो जाएगी, जिनके मरीज की तबीयत खराब होने पर जाम में फंस के परेशान होना पड़ता है। बच्चे भी बिना जाम में फंसे आसानी से अपने कॉलेज तक जा सकेंगे। शहर तेजी से विकसित हो रहा है, इसे व्यवस्थित करने में पुलिस की जहां भी भूमिका होगी, आगे बढ़कर पुलिस सहयोग करेगी। - डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी।

शहर में स्कूल की छुट्टी के समय जाम न लगे इसका ध्यान दिया जाता है, लेकिन फिर भी गाड़ियों की संख्या अधिक होने की वजह से परेशानी हो जाती है। बेतियाहाता रोड पर सभी क्लीनिक व अस्पताल है, जहां पर गंभीर मरीज को लेकर आने वाले वाहन सड़क पर जाते हैं और पीछे से आने वाले वाहनों को दिक्कत होती है। इसमें से कई में मरीज भी होते है, इस वजह से वहां पर मरीज को उतारने के बाद पुलिस वाहनों को हटवाती भी है, ताकि किसी अन्य को दिक्कत न होने पाए। यह परेशानी बढ़ रही है। चौड़ी सड़के के बावजूद गाड़ियों की संख्या अधिक होने से जाम की समस्या सामने आ जाती है। अगर यह शहर के बाद व्यवस्थित हो जाए तो निश्चित तौर से इसका फायदा हर सड़क पर चलने वालों को मिलेगा।-श्यामदेव विंद, एसपी ट्रैफिक।

जीडीए की हर नई परियोजना में स्कूल समेत अन्य व्यवसायिक संस्थान के लिए भूखंड अलग से आरक्षित किया गया है। खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी सेंटर में स्कूल के लिए छह भूखंड आरक्षित हैं। इनके लिए 22 फरवरी तक आवेदन किया जा सकता है। राप्तीनगर विस्तार और स्पोर्ट्स सिटी में भी स्कूलों के लिए भूखंड आरक्षित किया गया है। गोरखपुर महायोजना 2031 में भी शहर के बाहर स्कूल समेत अन्य गतिविधियों को हर मार्ग पर अलग-अलग स्थान चिंहित किया गया है। शहर के बीच स्थित बड़े स्कूलों के शहर के बाहर शिफ्ट करने का यह सुनहरा अवसर है। इससे शहर व्यवस्थित हो जाएगा और सबसे बड़ी समस्या जाम से मुक्ति मिल जाएगी।-आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए।

शहर को जाम से निजात के लिए मैंने बहुत गहनता से काम किया है। प्रशासन को सुझाव भी दिया है। सभी प्रमुख स्कूल शहर के बीच गोलघर इलाके में हैं। जब छुट्टियां होती हैं तो स्कूल के बच्चों तो जाम में फंसते ही हैं, शहर के लोग बड़ी मुश्किलों का सामना करते हैं। मेरा भी सुझाव है कि बड़े शैक्षणिक संस्थानों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की पहल होनी चाहिए। इन स्कूलों के प्राइमरी स्तर की पढ़ाई शहर में कराएं और उससे ऊपर की कक्षाओं का संचालन शहर के बाहर स्थापित स्कूल से करा दी जाए तो इससे जाम जैसी बड़ी समस्या से राहत मिल सकती है। साथ ही जो स्कूल शहर में संचालित हों उनकी छुट्टी का समय भी अलग-अलग कर दिया जाए। इसके अलावा दिन में तीन बजे तक बड़ी बसों एवं भारी वाहनों के शहर में प्रवेश प्रतिबंधित कर जाम से निपटा जा सकता है।-इंजी. सतीश सिंह, टाउन प्लानर एवं आर्किटेक्ट।

शहर का दायरा बढ़ता जा रहा है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम शहर करीब 20 किलोमीटर परिधि में फैल गया है। लेकिन, उस अनुपात में स्कूल और अस्पताल नए इलाकों में नहीं खुल रहे हैं। शहर में बहुत सारे स्कूल हैं। इन स्कूलों के सामने ऑटो खड़े हो जाते हैं और बच्चों के लेकर जब बसें जाती हैं तो जाम लग जाता है। स्कूल और अस्पताल में पार्किंग नहीं है। शहर को अगर व्यवस्थित करना है तो स्कूल और अस्पतालों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट करने की पहल करनी होगी। यह जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की ही नहीं है बल्कि स्कूल व अस्पताल के संचालकों को भी सोचना होगा।-इंजी. संजय मणि, आर्किटेक्ट।


 
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