वहीं, रात में तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे आने के बाद फिर बढ़कर 17 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसका असर यह हुआ कि सर्दी का असर केवल सुबह-शाम एक से दो घंटे तक ही रह गया। सोमवार को भी दिन में तेज धूप थी और दोपहर दो बजे अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, लेकिन देर शाम चली सर्द हवाओं के चलते तापमान में कमी आने लगी।
इस बार अधिक झेलना पड़ेगा सर्दी का असर
कृषि विज्ञान केंद्र की मौसम विज्ञानी श्रुति वी सिंह का कहना है कि जब भी मानसून सत्र में बारिश कम होती है, तो उसका असर सबसे पहले सर्दी के दिनों पर पड़ता है। इस साल बारिश कम हुई तो इसके चलते दिसंबर के पहले सप्ताह में भी अभी गर्मी का एहसास हो रहा है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में जब न्यूनतम तापमान कम होगा तो अचानक अधिक सर्दी पड़ने लगेगी। इस बार सर्दियों के दिन अधिक होने और न्यूनतम तापमान कम रहने के चलते लोगों को सर्दी का असर अधिक झेलना पड़ेगा।
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फिजिशियन डॉ. गौरव पांडेय ने कहा कि दिन में गर्मी के चलते लोग सर्दी से बचाव को लेकर सतर्क नहीं रहते। वहीं, रात में अचानक तापमान कम होने के चलते हल्के शर्ट पहने घूम रहे लोग ठंड की चपेट में आ जाते हैं। ऐसा मौसम बेहद खतरनाक होता है। सर्द-गर्म मौसम के चलते गले में संक्रमण तो होगा ही, शुगर व ब्लड प्रेशर के मरीजों को दिक्कत बढ़ जाएगी। इसलिए ऐसे मौसम में खुद को बचाकर रखें।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह ने कहा कि यह मौसम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। क्योंकि बच्चों का शरीर इतने तेज परिवर्तन को झेलने के लिए तैयार नहीं होता। ऐसे में सर्दी-गर्मी के चलते तीन साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का संक्रमण हो सकता है। बच्चे बुखार की चपेट में अधिक आते हैं। इसके अलावा जिनमें श्वसन संबंधी बीमारी है, वे भी प्रभावित होंगे। इसलिए ऐसे मौसम में खुद के स्वास्थ्य का ख्याल रखना बहुत जरूरी है।