डाक विभाग में कार्यरत डाककर्मी का बेटा दो साल तक अपनी मां के पेंशन खाते से रुपये लेते रहा और विभाग को उनके निधन की जानकारी तक नहीं दी। दिसंबर 2018 के बाद फरवरी-मार्च के बीच में 15 बार में लगभग आठ लाख रुपये पेंशन खाते से निकाले गए। बेटे ने सूचना नहीं दी और डाकविभाग के जिम्मेदार भी बिना जीवित प्रमाणपत्र जमा करवाए ही खाते से भुगतान करते रहे।
सहजनवां डाकघर में कार्यरत ब्रांच पोस्ट मास्टर (बीपीएम) अमरजीत के पिता डाककर्मी थे। उनकी मौत कुछ वर्षों पूर्व हुई थी। अमरजीत की मां पानमती का पेंशन खाता आरोग्य मंदिर डाकघर में चलता था। चूंकि, नियम है कि वर्ष में दो बार जीवित प्रमाणपत्र जमा करना होता है।
इसी के बाद पेंशन की धनराशि निकाली जा सकती है। बीपीएम ने मां के निधन होने के बाद इसकी सूचना डाकघर को नहीं दी। इधर, बिना जीवित प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए ही उप डाकपाल और डाक सहायक पेंशन खाते से अमरजीत को भुगतान करते गए।
एसएसपी मनीष कुमार ने बताया कि डाकघर में कर्मचारी होने के बाद भी विभागीय नियमों की अनदेखी करते हुए पेंशन निकाली गई। मामले की जांच की गई तो पेंशन खाते से बिना संबंधित जरूरी प्रमाण पत्रों के ही भुगतान किया जाता रहा जो काम के प्रति घोर लापरवाही दर्शाता है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद उप डाकपाल गया प्रसाद और डाक सहायक प्रभात तिवारी को निलंबित किया गया है। जांच अभी जारी है।
15 हजार पेंशन खाते जांच के दायरे में
पेंशन खाते से रुपये निकाले जाने का मामला सामने आने के बाद डाकघर प्रबंधन अन्य पेंशनरों को खातों की जांच करवाएगा। लगभग 15 हजार खाते हैं, जो जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा, क्या जीवित प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ही अन्य पेंशनरों को भी पेंशन की रकम दी गई? इसकी भी जांच करवाई जाएगी।