गोरखपुर कमिश्नर ने मंडल के सभी ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर) को सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे खुले रखने का निर्देश दिया है। ये निर्देश उन्होंने शनिवार को एनेक्सी भवन में मंडल के समस्त ईटीसी, मिनी पीआईसीयू और पीआईसीयू प्रभारियों के प्रशिक्षण शिविर के दौरान दिए।
अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की ओर से आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में दो वर्षों में ईटीसी में भर्ती किए गए एईएस मरीजों की समीक्षा की गई। साथ ही जेई/एईएस के रोगियों के उपचार को और बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मंडल के सभी जिलों के 75 चिकित्सक मौजूद रहे।
प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने किया। कहा कि प्रत्येक ईटीसी 24 घंटे सातों दिन क्रियाशील रहने चाहिए। मानक के तहत एईएस रोगियों का इलाज हो। एंबुलेंस का उपयोग प्रत्येक रोगी के लिए हो तथा आशा की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने एईएस रोगियों के उपचार की बारीकियों को बताया। आरएमआरसी के वैज्ञानिक डॉ. कामरान ने मरीजों की जरूरी जांच के बारे में जानकारी दी। साथ ही सैंपलिंग एवं ट्रांसपोर्टेशन के बारे में भी बताया।
पाथ संस्था के डॉ. राहुल कांबले ने सीआईएफ फॉर्म एवं डेथ ऑडिट के बारे में जानकारी दी। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल को मुख्यालय लाने की जानकारी दी। एडी हेल्थ डॉ. रक्षा रानी चतुर्वेदी ने ईटीसी चेकलिस्ट के बारे में जानकारी दी। जेई एईएस एपिडेमियोलॉजी एवं मंडल के चिकित्सालयों में एईएस रोगियों के भर्ती के संबंध में नोडल अधिकारी डॉ. वीके श्रीवास्तव ने जानकारी दी।