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गोरखपुर: बर्खास्तगी की रिपोर्ट के बाद अभी भी तैनात है निगम में ये कर्मचारी, जानिए क्या लगा था आरोप

Sun, 18 Jul 2021 01:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

43 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप, जांच में आरोप सिद्ध लेकिन बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए मामला ठंडे बस्ते में।
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बिजली घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर बिजली निगम वितरण खंड तृतीय में तैनात कैशियर इफ्तेखार पर 43.29 लाख रुपये का गबन का आरोप लगा था। इसमें तीन सदस्यी कमेटी ने जांच में इफ्तेकार को आरोपी पाया था। इसके बाद 1 फरवरी को ही उसके बर्खास्तगी के लिए डीस्कॉम में अधीक्षण अभियंता व मुख्य अभियंता ने पत्र भेज दिया था। एक महीने से अधिक होने के बाद अभी तक बर्खास्तगी नहीं हो सकी।
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दरअसल, नगरीय विद्युत खंड तृतीय मोहद्दीपुर में इफ्तखार अहमद सिद्दकी कैशियक पद पर थे। इन्होंने अपने सेवाकाल में कई रसीद बुक बंडल आवंटित करवाया था। कॉरपोरेशन की तरफ से मार्च 18 में ही मैनुअल रसीद को बंद कर सिस्टम को अपडेट कर कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया। लेकिन इफ्तेखार ने रसीद को जमा करने की जगह से इसी रसीद के माध्यम से लोगों के बिल जमा करने के साथ अन्य विभागीय लेनदेन जारी रखा।

अक्तूबर-18 में कॉरपोरेशन ने मैनुअल रसीद बुक बंडल का हिसाब मांगा। रसीद बुक सभी कर्मचारियों से मांगी जाने लगी। कर्मचारी रसीद बुक जमा करने में कोई रुचि नहीं दिखाए। जुलाई-19 में तृतीय खंड के नवागत एकउंटेंट ने खंड में जमा रसीद बुक व आवंटित रसीद बुकों की मिलान की। इसमें करीब 15 रसीद बुक बंडल से गायब मिले।
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इसी जांच के दौरान मामला खुलकर सामने आया। पता चला कि कैशियर इफतेखार का पास 15 रसीद बुक बंडल स्टोर पड़े हैं। इन्हें जमा नहीं करवाया गया है। इसके बाद अधिशासी अभियंता ने पत्र लिखकर कैशियर से रीसद बुक जमा करने को कहा। बावजूद इसके कैशियर ने रसीद बुक जमा नहीं की। इस दौरान कैशियर की डमी आईडी कारपोरेशन ने भेजी। इस डमी आईडी पर भी कैशियर ने 13.56 लाख रुपये जमा किए।

यह रकम खंड के बैंक खाते में जमा करने की बजाए कैशियर ने अपने खातें में जमा कर दी। इसके बाद फरवरी 20 में कैशियर की आलमारी से 15 रसीद बुक बंडल बरामद किए गए। इस रसीद बुक का मिलान करने पर बुको पर जमा 43.29 लाख रुपये निगम के खाते में जमा नहीं होने की बात सामने आई।

पूछताछ के बाद आरोपी कैशियर ने 10 लाख रुपये जमा करवा दिए। इधर निगम की तरफ से उक्त दोषी के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया। इसी के बाद मामले की विभागीय जांच तीन लोगों को जिम्मे थे। इनकी जांच रिपोर्ट पर फरवरी पर बर्खास्तगी के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन इसके बाद भी अभी तक मामला अटका पड़ा है।
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