विनोद वन में रखे गए हाथी (गंगा प्रसाद) के बेकाबू होने वाले समय को देखते हुए वहां सतर्कता बढ़ा दी गई है। उसकी जंजीरों को सुदृढ़ करने के साथ ही गंगा प्रसाद के ठिकाने को बदल दिया गया है। जंगल में ही उसे साफ-सुथरी जगह पर शिफ्ट किया गया है।
सितंबर-अक्तूबर में ही हाथी मदमस्त होते हैं। इस समय वो बेकाबू हो जाते हैं। पिछले साल भी अक्तूबर में ही गंगा प्रसाद बेकाबू हो गया था और उसने कुसुम्ही जंगल में उत्पात मचा दिया था। इसकी वजह से देवरिया और कुशीनगर जाने वाले रास्ते पर एयरपोर्ट के आगे रजही के पास आवागमन को भी बंद करना पड़ा था।
चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि हाथी के मदमस्त होने का समय नजदीक आ रहा है। ऐसे में वहां पर एहतियात बरती जा रही है। लोगों को भी उससे दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। इंसानों को देखकर उनके बिदकने की आशंका बढ़ जाती है। बरसात के समय उसको दूसरे जगह पर रखा गया था लेकिन अब उसे साफ-सुथरी जगह पर शिफ्ट किया गया है। वहां पर चूना और हल्दी का छिड़काव भी किया गया है।
मस्ती के समय उसके खानपान पर खासतौर से ध्यान दिया जाता है। एकांत वातावरण में ही वह शांत होते हैं। उनको शांत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी देते हैं और नहलाया जाता है। एनर्जी वाले डाइट को कम कर देते हैं। इस दौरान महावत भी उनसे दूर ही रहते हैं। इस संबंध में डॉ. योगेश ने बताया कि अक्तूबर में हाथी मदमस्ती में आते हैं।