अधूरे विद्युत उपकेंद्र पर बिखरा सामान।
- फोटो : अमर उजाला।
खखाईच खोर उपकेंद्र को साल 2012 में चालू होना था। एग्रीमेंट के मुताबिक काम पूरा न होने पर 2013 में फर्म के खिलाफ कार्रवाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती का आलम यह है कि एग्रीमेंट की अवधि बीतने के 12 साल बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अब तक अधिकारियों को फर्म को ब्लैक लिस्ट कर टेंडर व एग्रीमेंट निरस्त कर दूसरे ठेकेदार से काम करा देना चाहिए।
इन गांवों में होती है दिक्कत
मामखोर, खखाईचखोर, सरया महुलिया, जगदीशपुर, नेवादा, रामकोला, मजुरी, शिवपुर, जमीनभीटी, जमीनलौहरपुर, मझौरा, बरवल, सखरूआ, बड़गो, फत्तेपुर, बाघागाडा़, कौवाडील, सम्मेथान, भीटी, मऊवा, भरौली, बेलसड़ा, करौती, जमीनशुक्ल, मंझरिया, सकराखोर, बालभीटी, गौरपार, लोहरापार, बेलपार, रामपुर, गड़री, सरदहा, बडैला, चिरैयाडाड़, गांगुपार, चिमचा, भरपुरवा आदि हैं।
खखाईच खोर में अधूरा विद्युत उपकेंद्र।
- फोटो : अमर उजाला।
विद्युत कार्य मंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एनके श्रीवास्तव ने 2019 में उपकेंद्र को पूरा कराने की पहल की। छह माह के पत्राचार के बाद फर्म के मालिक योगेंद्र मेहता ने अधीक्षण अभियंता से संपर्क किया। अधीक्षण अभियंता के निर्देश पर फर्म ने 33 केबीए लाइन का निर्माण कराया।
उसके बाद भुगतान की मांग करने लगा। एग्रीमेंट में कार्य पूरा होने पर भुगतान देने का उल्लेख होने के कारण अधीक्षण अभियंता ने बीच में भुगतान करने से इनकार कर दिया। 25 लाख रुपये के भुगतान के अभाव में फर्म ने उपकरण लगाने और 11 केवी लाइन बनाने से हाथ खड़े कर दिए।
गोरखपुर माध्यमिक कार्य खंड विद्युत अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर ने कहा कि मुझे कुछ दिन हुआ यहां ज्वाइन किए, पूरी जानकारी नहीं है। खखाईच खोर उपकेंद्र का निर्माण कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। पत्रावली देखने के बाद अगर अबतक लखनऊ की फर्म को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया होगा तो उसे ब्लैकलिस्ट कर टेंडर व एग्रीमेंट निरस्त किया जाएगा। ताकि किसी दूसरे ठेकेदार से काम कराकर उपकेंद्र को चालू कराया जा सके।