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गोरखपुर: करोड़ों रुपये खर्च कर केबल कर रहे भूमिगत, फाल्ट लोकेटर एक भी नहीं

Sun, 04 Jul 2021 03:57 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

शहर के प्रमुख बाजारों में तारों को किया जा चुका है भूमिगत, फाल्ट आने पर हो सकती है दिक्कत।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बिजली निगम करोड़ों रुपये खर्च कर गोरखपुर शहर के तारों को भूमिगत कर रहा है लेकिन इसमें फाल्ट आने पर उसे लोकेट करने के लिए निगम के पास फाल्ट लोकेटर तक नहीं है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में तारों का भूमिगत करने का काम पूरा भी किया जा चुका है। इन तारों में अगर कहीं कोई फाल्ट आया तो इसके ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह कहना मुश्किल है। 
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जिला ही नहीं पूरे जोन में एक भी फाल्ट लोकेटर मशीन नहीं है। पिछले वर्ष नवंबर में एक पुरानी मशीन को 17 लाख रुपये में सही कर मंगवाया गया था। लेकिन रखरखाव और बदइंतजामी की वजह से वह फिर खराब हो गई।

गोरखपुर शहर में गोलघर, सिनेमा रोड, विजय चौक, बक्शीपुर, बेतियाहाता, तारामंडल, धर्मशाला, सुमेरसागर के अलावा आस पास के अन्य इलाकों में तारों को भूमिगत किया जा चुका है। इस मद में निगम की तरफ से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हालांकि, इस काम के दौरान गुणवत्ता और मानक में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, जिसके बाद काम पूरा होने में कुछ विलंब हो गया था। 
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12 मई 2020 की सुबह से लेकर देर रात तक अंडरग्राउंड केबल में फाल्ट आने से बिजली गुल रही। गोलघर, विश्वविद्यालय और धर्मशाला बाजार उपकेंद्रों से जुड़े करीब 25 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलना पड़ा। अफसर और कर्मचारी खराबी की तलाश करते-करते थक गए। फाल्ट लोकेटर मशीन न होने के कारण अंडरग्राउंड केबल में आयी खराबी की जानकारी ही देर शाम तक हो सकी। 
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29 करोड़ से पैडलेगंज से नौसड़ तक होगा काम

पता चला कि आंबेडकर पार्क के पास गड़बड़ी हुई है। इसके बाद लखनऊ से 35 हजार रुपये में किराये पर मशीन को मंगवाया गया, तब जाकर फाल्ट सही हो सका। बक्शीपुर इलाके में आए दिन फाल्ट की समस्या बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि फाल्ट की जानकारी होने पर गड्ढा खोदकर जगह-जगह चेक कर फाल्ट का पता लगाया जाता है। इससे फाल्ट खोजने में समय लगने के साथ राहगीरों को भी परेशानी होती है। संवाद

पैडलेगंज से नौसड़ तक हाईटेंशन लाइन को ट्रेंच में डालकर अंडरग्राउंड किया जाएगा। इस लाइन से लगभग 40 हजार उपभोक्ताओं को आपूर्ति कनेक्शनों की बिजली लाइन आधारित रहेगी। अगर बनने के बाद फाल्ट लोकेटर मशीन नहीं रही तो इसे खोजने और सही करने में घंटों समय लग सकता है। ऐसे में यह योजना उपभोक्ताओं के लिए बेहद आफत भरी हो जाएगी।

43 करोड़ रुपये से जेल बाईपास पर केबल होंगे अंडरग्राउंड
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष ही 43 करोड़ रुपये से जेल बाईपास से ओवरहेड तारों के हटाने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया था। कौवाबाग से बरगदवां तक फोरलेन निर्माण होने के दौरान ओवरहेड तारों को अंडरग्राउंड केबल के माध्यम से बिछाने के लिए 43 करोड़ रुपये पास किए जा चुके हैं। इसके बाद भी करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बाद भी अभी तक एक नई फाल्ट लोकेटर मशीन नहीं खरीदी जा सकी।

मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अंडरग्राउंड केबल दो तरह से शहर में बिछाया जा रहा है। कुछ जगहों पर ट्रेंच बिछाया जा रहा है। इसमें फाल्ट लोकेटर मशीन से फाल्ट खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, शहर के इलाकों में अंडरग्राउंड केबल बिछाया जा चुका है। इसे दिखवाना पड़ेगा कि वहां फाल्ट होने पर आखिर कैसे ठीक किया जा रहा है।
 
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