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Exclusive: बिजली निगम को पता ही नहीं, गीडा में 12 वर्ष तक तैनात रहे उसके एक्सईएन

Fri, 30 Sep 2022 10:11 AM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

 निगम के मुख्य अभियंता ने गीडा में विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं की ओर से करवाए जा रहे विद्युत संबंधी कार्यों के पर्यवेक्षण और बिना निगम की अनुमति लिए कराए गए कार्यों के संबंध में भी जांच रिपोर्ट तलब की है। इस मामले को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चा हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हद है! बिजली निगम के एक एक्सईएन को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तैनात कर दिया गया, और जिम्मेदार बेखबर रहे। मामला तब खुला, जब गीडा के सीईओ ने संबंधित एक्सईएन को कार्य मुक्त करने का पत्र बिजली निगम के मुख्य अभियंता को भेजा। अब मुख्य अभियंता ने प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।

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कमेटी यह जांच करेगी कि आखिरकार किसके आदेश से निगम के गीडा विद्युत उपकेंद्र के एक्सईएन सोमदत्त शर्मा ने गीडा में भी अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण किया था। निगम के मुख्य अभियंता ने गीडा में विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं की ओर से करवाए जा रहे विद्युत संबंधी कार्यों के पर्यवेक्षण और बिना निगम की अनुमति लिए कराए गए कार्यों के संबंध में भी जांच रिपोर्ट तलब की है। इस मामले को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चा हो रही है।

एक्सईएन का जवाब तो और हैरान करने वाला
बिजली निगम के मुख्य अभियंता एके सिंह ने मामला सामने आने के बाद एक्सईएन सोमदत्त शर्मा को पत्र जारी कर पूछा कि आखिर किसके आदेश पर उन्होंने गीडा में भी तैनाती स्वीकार की। जवाब में एक्सईएन ने जो कुछ कहा, वह और भी हैरान करने वाला है।
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उन्होंने मुख्य अभियंता को बताया कि वर्ष 2010 में सीईओ गीडा ने अधिशासी अभियंता के पद पर अतिरिक्त कार्यभार के लिए लिखित आदेश दिया था। तब से लेकर अभी तक गीडा विद्युत उपकेंद्र में तैनात होने वाले सभी अधिशासी अभियंता इस पद पर अतिरिक्त कार्यभार देख रहे थे। 29 अगस्त 2022 तक वह भी उसी आदेश के क्रम में गीडा में विद्युतीकरण कार्य की सतत निगरानी व पर्यवेक्षण का काम कर रहे थे।

हालांकि, एक्सईएन ने इस संबंध में कारपोरेशन के किसी आदेश या किसी पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अब मुख्य अभियंता ने कारपोरेशन के उस आदेश की प्रति तीन कार्यदिवस में मांगी है, जिसके आधार पर उन्होंने इस पद पर कार्यभार ग्रहण किया था।

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बोले जिम्मेदार

डीएम के पास सीईओ गीडा का भी कार्यभार था। उन्होंने ही गीडा में बिजली संबंधी काम देखने के लिए बिजली निगम के अधिशासी अभियंता को कार्यभार दिया था। दो महीने पहले गीडा में अधिशासी अभियंता इलेक्ट्रिक पद पर तैनाती हो गई है। इसके बाद सोमदत्त शर्मा के अतिरिक्त कार्यभार को खत्म कर दिया गया। -पवन अग्रवाल, सीईओ, गीडा।

बिजली निगम के किसी अभियंता को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने पर कारपोरेशन की अनुमति जरूरी है। तैनाती कैसे, किसने और क्यों की, इस दौरान क्या कार्य किया गया, इसकी जांच कर शीर्ष प्रबंधन को अवगत कराया जएगा। कारपोरेशन के पास इस संबंध में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। जिम्मेदारों को अपने स्तर से कम से कम लिखित जानकारी कारपोरेशन या शीर्ष अभियंताओं को देना चाहिए था। -एके सिंह, मुख्य अभियंता।

हमारे पहले के अभियंता भी इस पद पर थे। ये क्रम 2010 से चले आ रहा है। हमसे जवाब मांगा गया था, तो हमने दे दिया। -सोमदत्त शर्मा, अधिशासी अभियंता।

2010 से अभी तक ये रहे गीडा बिजलीघर में तैनात

दिनेश कुमार सिंह, धीरज सिन्हा, इंदराज यादव, बीएल आनंद और सोमदत्त शर्मा। इनमें से इंदराज यादव वर्तमान समय में ही शहरी मीटर परीक्षण खंड में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात हैं। बीएल आनंद देवरिया में अधिशासी अभियंता के पद पर थे, लेकिन एक मामले में मुख्य अभियंता ने उन्हें चार्जशीट दे दिया था।

2010 से अभी तक ये रहे मुख्य अभियंता
डॉ. एके श्रीवास्तव, पीके शर्मा, एके श्रीवास्तव, वीके श्रीवास्तव, एसपी पांडेय, डीके सिंह, एके सिंह, एनके श्रीवास्तव, एमके अग्रवाल, देवेंद्र सिंह, राजेंद्र प्रसाद और वर्तमान में एके सिंह मुख्य अभियंता हैं।
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