बिजली निगम ग्रामीण द्वितीय में एक फीडर पर करीब 12 हजार उपभोक्ताओं के फर्जी नाम पर बिजली कनेक्शन चल रहा था। पांच महीने बाद ऊर्जा निगम के चेयरमैन ने इस लापरवाही को पकड़ा। उन्होंने अभियंताओं से डिफाल्टर सूची की जांच करवाने के निर्देश दिए है।
चेयरमैन के निर्देश पर ग्रामीण वितरण मंडल द्वितीय के एसई ने जब मास्टर डेटा से फीडरों का मिलान किया तो पाया कि पुराने फीडरों के नाम से ही कुछ नए फीडर सिस्टम में बन गए हैं। अंतर सिर्फ यह है कि उनके नाम के आगे नया कोड दर्ज हो गया है।
जांच कराई तो पाया कि ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम में चल रहे फेक (गलत) नाम से चार फीडर व 15 हजार कनेक्शनों का मामला जुलाई का है। जुलाई में पावर कारपोरेशन ने पुराने एम पावर साफ्टवेयर से डाटा नए साफ्टवेयर आरएमएस पर ट्रांसफर कराया। एसई ने बताया कि डाटा की जांच करवाई गई है। चार फीडरों पर कुछ फेक नाम से नए डाटा की वजह से रिकार्ड दर्ज हो गया है।