गोरखपुर जिले के बिजली निगम के अभियंताओं ने 2016 से लेकर 2018 के बीच बिना बिजली बिल जमा किए उसी परिसर में दूसरा बिजली कनेक्शन दे दिया। ये सभी 98 उपभोक्ता शहरी खंड व देवरिया खंड के हैं। इन सभी उपभोक्ताओं की सूची एमडी ऑफिस से तैयार की गई है। एमडी पूर्वांचल ने डिस्काम के विशेष कार्याधिकारी वाणिज्यिक पीपी दीक्षित को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने के लिए निर्देशित किया है।
पत्र में लिखा है कि क्षेत्र के वितरण खंडों में 2016 से लेकर 2018 के बकाएदार उपभोक्ताओं से बकाया धनराशि की वसूली किए बिना ही, उन्हीं बकाएदारों को नया संजोयन जारी कर दिया। इन खंडों में एक ही मैनुअल रसीद से एक से अधिक बार भुगतान प्राप्त किया गया है। इस जांच के लिए दो अधिकारियों की तैनाती भी की गई है। इन्हें दस कार्यदिवस के भीतर ही रिपोर्ट तैयार कर भेजनी है। दरअसल, इधर के दिनों में लगातार एमडी स्तर से बिजली बिल, मीटर व अन्य गड़बड़ियों की रिपोर्ट भेजी जा रही है। जांच का पत्र आने से खंड में अभियंताओं के बीच हड़कंप मचा है।
एमडी स्तर से अभी चार दिन पहले 100 मीटर की सूची भेजी गई थी। आरोप था कि उपभोक्ताओं के परिसर में नाम मात्र बिजली उपभोग की जाती थी। इन उपभोक्ताओं के परिसर में 10 यूनिट से कम की बिजली खपत मिली थी। मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीम को जांच सौंप दी गई है। इनकी रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। इसकी जांच अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा और लेखाधिकारी मनोज कुमार वर्मा को सौंपी गई है।