लक्षण
- तेज बुखार आना, त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने विकसित होना।
- ये दाने मुख्य रूप से शरीर के मध्य भाग, सिर, गर्दन, पेट, पीठ छाती आदि पर दिखाई देते हैं।
- शरीर में दाने बड़े या फिर छोटे आकार के होते हैं।
बचाव और उपचार
- मरीज को अलग रखना आवश्यक है।
- अगर किसी बच्चे को यह बीमारी हो जाती है तो उसे स्कूल या कहीं बाहर न जाने दें।
- रोगी को छींकने तथा खांसते समय नाक व मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए।
- रोगी की नाक और मुंह से निकले वाले स्राव को जमीन में दबा देना चाहिए।
- जूस, नारियल, पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस बीमारी को कहते हैं माताजी
डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि चिकन पॉक्स बीमारी के मामले में ग्रामीण इलाकों में कई भ्रांतियां हैं। इसे दूर करने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे माताजी कहते हैं। जबकि, यह संक्रामक बीमारी है। इसका इलाज है। सही समय पर इलाज होने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। इसलिए अगर किसी को यह बीमारी है तो वह तत्काल डॉक्टर से इलाज कराए। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े।