इलेक्ट्रिक बसों का संचालन महानगर के नौ रूटों पर हो रहा है। इन रूटों पर 300 से अधिक स्टॉपेज निर्धारित किए गए हैं। लेकिन ये सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। किसी भी स्टॉपेज पर जिम्मेदारों ने न कहीं शेड लगाया और न कोई बोर्ड। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महानगर के 40 बस स्टाॅपेज पर शेड लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, लेकिन अभी इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी शेड लगवा दिए जाएंगे।
- पीके तिवारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इलेक्ट्रिक बस संचालन समिति।
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इलेक्ट्रिक बस कभी समय पर नहीं आती है। बस के लिए कभी-कभी घंटे भर से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ता है, बसों के इंतजार के दौरान धूप में खड़ा होना पड़ता है।
- दिलीप कुमार, पिपराइच
इलेक्ट्रिक बस में सफर काफी आरामदायक है, लेकिन बसों का इंतजार करने में हालत बिगड़ जाती है। जिम्मेदारों ने धूप और बारिश से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं।
- आदित्य, मेडिकल रोड
बसें कम होने से काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ता है। बारिश और गर्मी में बसों को पकड़ने में ज्यादा दिक्कत होती है। शेड के इंतजाम की आवश्यकता है।
- दीप प्रकाश, गोरखनाथ।