गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग के बाद शुल्क जमा करना छात्रों के लिए मुसीबत बन गया है। काउंसिलिंग के 10 दिन बाद भी शुल्क जमा नहीं होने से छात्र परेशान हैं। मोबाइल पर लिंक नहीं आने से अब उनको प्रवेश न होने का डर सता रहा है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर पारंपरिक विषयों में आधी से लेकर एक तिहाई तक सीटों पर शुल्क जमा नहीं हुए हैं। उदाहरण के लिए बीए में कुल 2140 सीटें हैं। जबकि रविवार की रात 9 बजे तक वेबसाइट पर 1055 छात्र ही शुल्क जमा कर सके हैं। बीएससी गणित में कुल 264 सीटों के सापेक्ष 215 सीटों पर, बीएससी बायोलॉजी में 132 सीटों के सापेक्ष 120, बीकॉम में 440 सीटों के सापेक्ष कुल 370 सीटों पर ही शुल्क जमा हुआ है।
परास्नातक पाठ्यक्रम में भी यही हाल है। एमए हिन्दी में 132 में 90, एमए समाजशास्त्र में 132 में सिर्फ 30, राजनीति शास्त्र में 132 में 110, अंग्रेजी में 132 में 115, प्राचीन इतिहास में 132 में 75, एमए इतिहास में 132 में 75 अभ्यर्थी ही शुल्क जमा कर सके हैं। एमएससी गणित में 132 सीटों के सापेक्ष 125, एमएससी फिजिक्स में 55 में से 45, जूलॉजी में 55 में 53, बॉटनी में 55 में 5, केमिस्ट्री में 66 में 61 सीटों पर शुल्क जमा हुए हैं।
काउंसिलिंग के दस दिन बाद भी नहीं जमा हो सका शुल्क
बीए में प्रवेश के लिए गोरखनाथ क्षेत्र की रहने वाली सर्मिष्ठा ने 9 अगस्त को कला संकाय में काउंसिलिंग करवाई थी। उन्हें 10 अगस्त को लिंक आने पर शुल्क जमा करने को कहा गया। मोबाइल पर लिंक नहीं आने से वह शुल्क जमा नहीं कर सकी हैं। इसके लिए वहविश्वविद्यालय का चक्कर लगा रही हैं। इसी प्रकार एमएससी बॉटनी में काउंसिलिग के एक सप्ताह बाद भी शुल्क जमा करने के लिए लिंक नहीं आने से परेशान छात्रा ने सोमवार को प्रशासनिक भवन स्थित मोहन सिंह भवन पहुंच कर संबंधित एजेंसी के कर्मचारियों से मुलाकात की। इस पर उनको साइबर कैफे में जाकर शुल्क जमा करने की सलाह दी गई।
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विश्वविद्यालय का दावा खोखला निकला
गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी अभ्यर्थियों को निर्देश दिया था कि स्नातक प्रथम चरण में काउंसलिंग वालों को 10 को जबकि परास्नातक प्रथम चरण वालों को 14 को शुल्क जमा करना होगा। जबकि स्नातक व परास्नातक के प्रथम चरण में काउंसिलिंग कराने वाले कई छात्र लिंक नहीं आने से अब तक शुल्क जमा नहीं कर पाए हैं।
खाली सीटों को लेकर असमंजस
प्राय: कांउसलिंग के बाद भी बहुत से अभ्यर्थी प्रवेश नहीं लेते हैं। इधर, शुल्क जमा नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि सभी सीटें वाकई भर गई हैं या कुछ अभ्यर्थी प्रवेश नहीं लेंगे। इसे लेकर हजारों की संख्या में अभ्यर्थी ऊहापोह में हैं।