भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की अधिसूचना के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और मान में संशोधन करते हुए सरसों तेल को बिना किसी सम्मिश्रण के बेचना बाध्यकारी कर दिया गया है। पहले सरसों के तेल में चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम तेल या अन्य किसी सस्ते खाद्य तेल की मिलावट होती थी। अब ऐसा नहीं होगा। वहीं लोगों को शुद्ध सरसों का तेल मेड इन गोरखपुर से ही प्राप्त हो जाएगा।
नए साल में फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हो जाएगा। खाद्य तेल के रूप सरसों, मूंगफली और तिल के तेल का उत्पादन किया जाएगा। चार करोड़ लागत की इस कंपनी की क्षमता करीब चार टन प्रतिदिन की होगी। प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से किसानों समेत 250 लोगों को रोजगार मिलेगा। - अतुल सिंह, एमडी, राजयश एग्रोवेदिक एंड हेल्थ केयर