बिजली निगम के जिम्मेदारों ने लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में छह हजार जरूरतमंदों के ‘सौभाग्य’ पर ग्रहण लगा दिया। जरूरतमंद व कम पढ़े लिखे उपभोक्ताओं के एक नाम पते पर 2-2 और 3-3 बिजली कनेक्शन जारी कर दिया गया। अपना काम पूरा कर संकट बिजली निगम के इन उपभोक्ताओं पर डाल गए। अब इनके पास प्रतिमाह दो या तीन कनेक्शनों के आधार पर बिजली बिल बन रहा है।
सौभाग्य के उपभोक्ताओं का यह दर्द चेयरमैन के पास पहुंचा है। उन्होंने सख्ती के साथ इन मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। सप्ताह भर पहले शुरू हुई इस जांच में अभी तक छह हजार ऐसे उपभोक्ताओं का पता चला है, जिन्हें एक से अधिक कनेक्शन जारी हुए हैं।
जिले में सौभाग्य योजना के 17 हजार कनेक्शनों की जांच चल रही है। शुरुआती जानकारियां सामने आने के साथ कार्यदायी फर्म की कलई खुलने लगी है। जरूरतमंदों को नि:शुल्क बिजली कनेक्शन देने की सरकार की योजना के तहत ठेकेदारों को लक्ष्य दिए गए थे। इन लक्ष्यों को धरातल पर पूरा करने के बजाए कुछ ठेकेदारों ने शार्टकट का रास्ता चुन लिया।
कागजों में एक ही नाम-पते पर दो-दो, तीन-तीन कनेक्शन जारी कर दिए। ग्रामीण वितरण मंडल प्रथम व द्वितीय के सभी छह वितरण खंडों के अवर अभियंता अपने क्षेत्र में सौभाग्य योजना के कनेक्शनों की जांच कर रहे हैं। वे लाभार्थियों के घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। इसके साथ ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम में डाटा भी फिल्टर कर जांच कर रहे हैं।
नोडल अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि चेयरमैन के निर्देश पर सौभाग्य योजना के कनेक्शनों की जांच हो रही है। अभी तक की जांच में लगभग छह हजार ऐसे लाभार्थी मिले हैं जिनके नाम पर एक से अधिक कनेक्शन है। पूरी गणना के बाद एमडी दफ्तर को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। फर्म को किए भुगतान से कटौती भी हो सकती है।