मानचित्र स्वीकृत, रुपये ही नहीं जमा कर रहे आवेदक
मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया में आया बदलाव इससे भी महसूस किया जा सकता है कि जीडीए ने 137 मानचित्र स्वीकृत कर दिए मगर आवेदक फीस ही नहीं जमा कर रहे। सभी को फोन कर बार-बार रिमाइंडर दिया जा रहा है। जीडीए के मुताबिक यदि इन आवेदकों ने रुपये जमा कर दिए तो जीडीए को इससे भी मोटी आय होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि प्राधिकरण के लिए लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन नक्शा दाखिल होने के बाद अधिकतम एक सप्ताह में निस्तारित कर दिया जा रहा है। एक साल में 1254 मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इनसे 60 करोड़ से अधिक की आय हुई है। इस धनराशि का उपयोग शहर के विकास में किया जा रहा है। यदि किसी को भी मानचित्र से जुड़ी समस्या हो तो वह सीधे मुझसे आकर मिल सकता है।