इसके अलावा तत्कालीन डीआईजी, संतकबीरनगर के एसपी सहित 24 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। संजय निषाद फरार हो गए थे। पुलिस ने संजय निषाद समेत 36 लोगों के खिलाफ सहजनवां के तत्कालीन एसओ श्यामलाल यादव की तहरीर पर हत्या, बलवा, आगजनी, तोड़फोड़, सेवन सीएलए समेत कई गंभीर आरोपों में केस दर्ज किया था।
पुलिस का यह था आरोप, कोर्ट में हाजिर हुए थे डॉ. संजय
पुलिस का कहना था कि गोली किसी कार्यकर्ता ने चलाई, लेकिन निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना था कि गोली पुलिस ने चलाई है। मामले में रोडवेज, वन विभाग और रेलवे की ओर से भी चार केस कार्यकर्ताओं पर दर्ज कराए गए थे। घटना के छह महीने बाद डॉक्टर संजय निषाद ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और जेल भेजे गए। बाद में सभी मुकदमे सहजनवां और कैंपियरगंज से ट्रांसफर कर
दूसरे सर्किल में भेज दिया गया।
कोर्ट से डॉ. संजय ने दर्ज कराया पुलिस वालों पर केस
जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद संजय निषाद ने भी कोर्ट से 156 तीन के तहत पुलिस वालों पर मुकदमा दर्ज कराया था। उनका का आरोप था कि गोली पुलिस ने चलाई थी, जिससे अखिलेश की मौत हुई। उनका आरोप समाजवादी पार्टी पर था। उनका कहना है कि सपा सरकार ने गोली कांड कराया है। कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमे में फंसाया गया है।
2019 लोकसभा चुनाव से पहले संजय निषाद भाजपा के करीब आ गए। नतीजा यह रहा कि उनके बड़े बेटे प्रवीण जो गोरखपुर के सपा से सांसद थे, वे भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के टिकट पर संतकबीरनगर से सांसद हो गए। इसके बाद अब 2022 विधानसभा में उनके छोटे बेटे सरवन निषाद भी भाजपा के टिकट से चौरीचौरा के विधायक बन गए।
यह हो सकती है सजा
- धारा 302 : हत्या (सजा-आजीवन कारावास या फांसी व जुर्माना)
- धारा 307 : हत्या की कोशिश (सजा-10 साल की सजा व जुर्माना)
- धारा 332 : लोकसेवक के काम में बाधा (सजा-तीन वर्ष तक की सजा व जुर्माना या दोनों)
- धारा 353 : सरकारी काम में बाधा (सजा-एक अवधि की सजा)
- धारा 186 : लोकसेवक के काम में जानबूझकर बाधा डालाना (सजा-एक माह तक)
- धारा 336 : उतावलेपन से ऐसा काम कर जीवन को संकट में डाला (सजा-तीन महीने तक)
- धारा 435 : कृषि भूमि का नुकसान करना (सजा-एक अवधि की सजा जिसे सात वर्ष तक किया जा सकता है)
- धारा 436 : आगजनी (सजा-10 साल व आर्थिक दंड)
- धारा 150-151: रेलवे एक्ट (सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक)