पूरा मामला आरोपी गिरोह के अधिवक्ता के हाईकोर्ट जाने पर पलट गया। कैंट थाने में दर्ज केस में आरोपी गिरोह के अधिवक्ता स्टे के लिए गए थे। तभी बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दो सीओ की जांच रिपोर्ट का हवाला दे दिया। इसके बाद ही कोर्ट ने स्टे देने से इन्कार करते हुए पूरे मामले में अब तक हुई कार्रवाई के साथ एसएसपी गोरखपुर को 18 अक्तूबर को तलब कर लिया। और मामला कोर्ट के संज्ञान में आ गया। अब कोर्ट ने जिला अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
एफआर लगाने वाले दरोगा ने दिया शपथपत्र
महिला ने 2016 के दौरान ही कैंपियरगंज थाने में तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। मामले में आरोपी पहले जेल भेजे गए, फिर पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की। अफसरों के आदेश पर हुई जांच में पुलिस ने पाया कि मामला पूरी तरह से फर्जी है। विवेचक ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। महिला को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उसने फिर विवेचक रहे दरोगा पर ही लूट, बलवा, धमकी देने का केस दर्ज करा दिया। इस बार उसका आरोप था कि केस की जांच के दौरान दरोगा ने उससे रुपये छीन लिए और धमकी दी। दरोगा ने सीओ बांसगांव को दिए शपथपत्र में महिला को पेशेवर और अधिवक्ता को संरक्षक बताया है।
फर्जी केस कर ले ली चार लाख की सरकारी मदद
सीओ बांसगांव की जांच में सामने आया है कि एक मामले में न्यायालय के आदेश पर दर्ज केस में सरकार से चार लाख रुपये महिला ने ले लिए हैं। इस मुकदमे में भी नामजद अधिवक्ता वही हैं। जबकि, इस केस की जांच कर विवेचक ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
आज भी याद है जेल में 52 दिन की यातना
कैंपियरगंज पीड़ित खालिद ने कहा कि 2016 में मेरे खिलाफ फर्जी केस दर्ज कराया गया। इसके बाद तीन और केस दर्ज हुए। मुझे लूट तक का आरोपी बनाया गया। सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद घरवालों तक से नजर नहीं मिला पाता था। 2019 में इस दर्ज केस में मुझे जेल जाना पड़ा। 52 दिन जेल में कैसे बीते आज भी मुझे याद है। घरवालों ने एक समय के लिए मुंह मोड़ लिया था। बड़ी मुश्किल से परिवार को समझा पाया कि मैं गलत नहीं हूं। अब हाईकोर्ट से न्याय मिला है। दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराने वाली महिला व गिरोह के दूसरे सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। महिलाओं को अधिवक्ता का संरक्षण प्राप्त है। अधिवक्ता के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।
दीवानी कचहरी अधिवक्ता मृत्युंजय राज सिंह ने कहा कि गिरोह ने कई लोगों पर फर्जी केस दर्ज कराया है। इसकी जानकारी होने के बाद मैंने केस की पैरवी की। मामला सही होने पर सफलता मिली। एक अधिवक्ता होने का कर्तव्य मैंने निभाया है और आगे भी इस का निर्वहन करुंगा।