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गोरखपुर: कसरवल कांड से सुर्खियों में आए संजय, बदल गई थी राजनीतिक हैसियत

Thu, 13 Oct 2022 02:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर सदर सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी और अर्से बाद इस पर गैर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इसके बाद संजय का कद राजनीति में बढ़ता चला गया, लेकिन इसी कसरवल कांड ने एक बार फिर डॉ. संजय निषाद की परेशानी बढ़ा दी है।
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डॉ. संजय कुमार निषाद। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सात जून 2015 को सहजनवां इलाके में हुए कसरवल कांड ने डॉ. संजय निषाद को सुर्खियों में लाया था। इसके बाद ही इनकी राजनीतिक हैसियत बदल गई और कद बढ़ता चला गया। तब सपा सरकार ने उन्हें हल्के में लिया था, लेकिन बाद में सपा से हाथ मिलाकर संजय ने अपने बेटे प्रवीण निषाद को टिकट दिलाया और वह पहली बार संसद में पहुंचे थे।

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गोरखपुर सदर सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी और अर्से बाद इस पर गैर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इसके बाद संजय का कद राजनीति में बढ़ता चला गया, लेकिन इसी कसरवल कांड ने एक बार फिर डॉ. संजय निषाद की परेशानी बढ़ा दी है।

जानकारी के मुताबिक, सरकारी नौकरियों में निषादों को पांच फीसदी आरक्षण देने की मांग को लेकर कसरवल में निषादों का धरना प्रदर्शन और रेल का चक्का जाम का कार्यक्रम था। सुबह से ही कार्यकर्ताओं का आना शुरू हो गया। देखते ही देखते दोपहर एक बजे तक हजारों की संख्या में निषाद कसरवल पहुंच गए थे। उन्हें रोकना और मनाना गोरखपुर व संतकबीरनगर की पुलिस के लिए मुश्किल हो गया था।
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कार्यकर्ता कसरवल में रेलवे ट्रैक पर चारपाई, विस्तर आदि लगाकर घंटों बैठे थे। इस बीच किसी ने पत्थर चला दिया। जिसके बाद लाठीचार्ज हुआ। आंसू गैस के गोले दागे और रबर बुलेट का भी इस्तेमाल हुआ। हालात बेकाबू होता देख कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई राउंड गोलियां चलीं। जिससे इटावा से आए कार्यकर्ता अखिलेश निषाद की मौत हो गई। कई कार्यकर्ता घायल हुए थे।

इसके अलावा तत्कालीन डीआईजी, संतकबीरनगर के एसपी सहित 24 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। संजय निषाद फरार हो गए थे। पुलिस ने संजय निषाद समेत 36 लोगों के खिलाफ सहजनवां के तत्कालीन एसओ श्यामलाल यादव की तहरीर पर हत्या, बलवा, आगजनी, तोड़फोड़, सेवन सीएलए समेत कई गंभीर आरोपों में केस दर्ज किया था।

पुलिस का यह था आरोप, कोर्ट में हाजिर हुए थे डॉ. संजय
पुलिस का कहना था कि गोली किसी कार्यकर्ता ने चलाई, लेकिन निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना था कि गोली पुलिस ने चलाई है। मामले में रोडवेज, वन विभाग और रेलवे की ओर से भी चार केस कार्यकर्ताओं पर दर्ज कराए गए थे। घटना के छह महीने बाद डॉक्टर संजय निषाद ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और जेल भेजे गए। बाद में सभी मुकदमे सहजनवां और कैंपियरगंज से ट्रांसफर कर
दूसरे सर्किल में भेज दिया गया।

कोर्ट से डॉ. संजय ने दर्ज कराया पुलिस वालों पर केस
जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद संजय निषाद ने भी कोर्ट से 156 तीन के तहत पुलिस वालों पर मुकदमा दर्ज कराया था। उनका का आरोप था कि गोली पुलिस ने चलाई थी, जिससे अखिलेश की मौत हुई। उनका आरोप समाजवादी पार्टी पर था। उनका कहना है कि सपा सरकार ने गोली कांड कराया है। कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमे में फंसाया गया है।

 
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2019 लोकसभा से पहले भाजपा में आ गए डॉ. संजय

2019 लोकसभा चुनाव से पहले संजय निषाद भाजपा के करीब आ गए। नतीजा यह रहा कि उनके बड़े बेटे प्रवीण जो गोरखपुर के सपा से सांसद थे, वे भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा के टिकट पर संतकबीरनगर से सांसद हो गए। इसके बाद अब 2022 विधानसभा में उनके छोटे बेटे सरवन निषाद भी भाजपा के टिकट से चौरीचौरा के विधायक बन गए।

यह हो सकती है सजा
  • धारा 302 : हत्या (सजा-आजीवन कारावास या फांसी व जुर्माना)
  • धारा 307 : हत्या की कोशिश (सजा-10 साल की सजा व जुर्माना)
  • धारा 332 : लोकसेवक के काम में बाधा (सजा-तीन वर्ष तक की सजा व जुर्माना या दोनों)
  • धारा 353 : सरकारी काम में बाधा (सजा-एक अवधि की सजा)
  • धारा 186 : लोकसेवक के काम में जानबूझकर बाधा डालाना (सजा-एक माह तक)
  • धारा 336 : उतावलेपन से ऐसा काम कर जीवन को संकट में डाला (सजा-तीन महीने तक)
  • धारा 435 : कृषि भूमि का नुकसान करना (सजा-एक अवधि की सजा जिसे सात वर्ष तक किया जा सकता है)
  • धारा 436 : आगजनी (सजा-10 साल व आर्थिक दंड)
  • धारा 150-151: रेलवे एक्ट (सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक)


 
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