बच्चों को खुद की देखरेख न दे पाने का मलाल
जेल से 14 साल बाद बेगुनाह साबित होने के बाद डॉ बीएन दास घर तो पहुंच गए, लेकिन बच्चों को बेहतर परवरिश न दे पाने का मलाल उनके मन में है। वह कहते हैं कि बच्चों को बढ़ते नहीं देख पाए। जब छोटे थे तो जेल में गए, आज दोनों उच्च शिक्षा ले रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, करीब 14 साल पहले डॉ बीएन दास दूसरी पत्नी के हत्या के आरोप में जेल गए थे। तब उनकी दूसरी पत्नी से बच्चों की उम्र 8 से 10 साल थी। दोनों बच्चे जैसे-तैसे पढ़ाई किए और परिवार वाले डॉक्टर को बेगुनाह साबित करने के लिए कोर्ट का चक्कर लगाते रहे। निचली अदालत से सजा होने के बाद परिवार वालों ने उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटाई और हाईकोर्ट में मामले को लेकर गए।
इसी का सुखद नतीजा यह रहा कि करीब चौदह साल बाद सोमवार को डॉ दास जेल से रिहा होकर घर पहुंच गए। यही नहीं उनके सिर से हत्या करने का कलंक भी धुल गया।
डॉ बीएन दास ने कहा कि न्याय की जीत होती है। केवल इस बात का दुख है कि 14 साल तक बिना किसी गलती के सजा काटनी पड़ी। इससे बच्चों की देखभाल नहीं कर पाए।