वरिष्ठ अधिवक्ता व्यंकटेश्वर नाथ तिवारी बताते हैं-दान विलेख की प्रक्रिया के जरिए प्रॉपर्टी को किसी को भी दान किया जा सकता है। इसमें रक्त संबंधों में दान दिया जा सकता है। किसी बाहरी को भी दे सकते हैं। दान विलेख यानी कि गिफ्ट डीड में जिसके नाम से प्रॉपर्टी दान की जाती है, उसके खिलाफ आगे चलकर किसी तरह का दावा, क्लेम या मुकदमा करने पर बैनामा मंसूख होने की संभावना नहीं होती। जमीन का खारिज दाखिला भी अटक सकता है। लेकिन दान विलेख लेने वाले व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती।
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करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाने वाले सुधीर सिंह के पक्ष में दान विलेख पर पुलिस को शक है। पुलिस मान रही है कि डरा-धमकाकर दान विलेख कराया गया है। इसमें दानदाता कोई क्लेम नहीं कर पाते हैं। इसलिए अभी तक ऐसी संपत्तियों के बारे में कोई जानकारी नही मिल सकी। अन्य आपराधिक और भूमाफिया के मामलों में भी ऐसा खेल सामने आ सकता है। इसलिए पुलिस नए सिरे से पड़ताल की तैयारी में है।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि पुलिस की जांच में ऐसे मामले आए हैं। गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध अर्जित संपत्ति की छानबीन कराई जा रही है। जिनके संंबंध में सूचना आएगी, कार्रवाई की जाएगी।