उधर, किसी अन्य अभ्यर्थी या शिक्षक के दस्तावेज के आधार पर सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच लखनऊ से लेकर गोरखपुर एसटीएफ तक कर रही है। बेसिक शिक्षा विभाग भी शिकायत मिलने के आधार पर फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई कर रहा है। इनके अलावा माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ शिकायत मिलती है तो विभाग की ओर से जांच कराई जाती है।
मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद से समर्पित टीम को बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने वाले तमाम शिक्षकों के नाम सामने आने की उम्मीद है। साथ ही जांच के दायरे में वह अधिकारी-कर्मचारी भी आएंगे, जिन्होंने इनके प्रमाणपत्रों को सत्यापित किया है।
बेसिक शिक्षा विभाग
- प्राथमिक विद्यालय - 2151
- उच्च प्राथमिक- 834
- अनुदानित विद्यालय बेसिक- 83
- राजकीय विद्यालय -4
- कस्तूरबा विद्यालय- 20
- कुल शिक्षक - 8500
- शिक्षा मित्र - 3300
- अनुदेशक - 535
माध्यमिक शिक्षा विभाग
- वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय- 347
- अशासकीय सहायता प्राप्त - 117
- राजकीय माध्यमिक विद्यालय - 21
- कुल शिक्षक - 5500
गोरखपुर विश्वविद्यालय
- कॉलेज -347
- कुल शिक्षक -3800
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री श्रीधर मिश्र ने कहा कि फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शिक्षक संघ ने हमेशा विभाग को अपेक्षित सहयोग दिया है। मगर, सत्यापन के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए। कुछ फर्जी लोगों की आड़ में पूरे शिक्षक समाज का उत्पीड़न न हो ये सरकार सुनिश्चित करे। शिक्षक संगठन पूरा सहयोग देगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री रंजीत सिंह ने कहा कि जांच के नाम पर हमेशा शिक्षकों को कसौटी पर तौला जाता है। कोई गुरेज नहीं हैं, मगर परेशान किया जाना ठीक नहीं हैं। सरकार इसका भरोसा भी दिलाए, यथा संभव मदद की जाएगी। इसके साथ ही शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में काम हो ताकि ऐसेे लोग विभाग में नियुक्ति ही ना पा सकें।