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Gorakhpur News: गोरखपुर जिले के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग में ठनी, सीएमओ ने दी चेतावनी

Mon, 30 Jan 2023 12:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

सीएमओ ने एक से ज्यादा नर्सिंग होम (अस्पतालों) में अपना पंजीकरण कराने वाले डॉक्टरों को नाम वापस लेने के लिए 15 दिन का समय दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि अगर 15 दिनों में आवेदन नहीं मिले तो स्वास्थ्य विभाग नर्सिंग होम से डॉक्टर का पंजीकरण निरस्त करेगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी करेगा।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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फर्जी अस्पतालों के संचालन पर स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों के संगठन नर्सिंग होम एसोसिएशन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में ठन गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी 153 डॉक्टरों की सूची को चिकित्सकों के संगठनों ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सभी डॉक्टर सही कार्य कर रहे हैं। आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग गलत लोगों की जांच नहीं कर रहा है। वहीं, सीएमओ अपनी सूची को सही बता रहे हैं।

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नर्सिंग होम एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रविवार को बैठक करके स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी 153 डॉक्टरों की सूची पर गहरी नाराजगी जताई। इन संगठनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की सूची में 80 फीसदी अस्पताल झोलाछाप, एंबुलेंस ड्राइवर, प्रापर्टी डीलर और असामाजिक तत्व चला रहे हैं, लेकिन विभाग इनकी जांच नहीं कर रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग की सूची में ज्यादातर ऐसे डॉक्टर हैं जिनके नाम पर क्लीनिक और अस्पताल हैं। ये डॉक्टर क्लीनिक पर मरीज देखते हैं और अस्पताल में भर्ती भी करते हैं। ऐसे डॉक्टरों के नाम पर अंगुली उठाना गलत है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जिस डॉक्टर के नाम पर दो संस्थान मान रहा है, वह एक ही है। सूची में कई ऐसे डॉक्टरों के नाम हैं, जिनके नाम पर नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जबकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन की मदद से जिले और आसपास के जिलों में अस्पतालों की जांच करे, ताकि फर्जी तरीके से पंजीकरण करने वाले लोगों की पोल खुले। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि, कई लोग फर्जी तरीके से अस्पताल चला रहे हैं, लेकिन उन पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है।
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नर्सिंग होम एसोसिएशन के सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर किराये पर अपना नाम किसी अस्पताल में पंजीकृत करता है, तो यह गलत है। स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप व फर्जी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करे। इसमें एसोसिएशन हर संभव मदद करेगी। इस मौके पर उपाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी डॉ. अभिनीत बाजपेई आदि मौजूद थे।

 

धांधली रोकने के लिए नियमों का पालन जरूरी

  • अस्पताल और क्लीनिक का पंजीकरण हर वर्ष होता है। स्वास्थ्य विभाग ध्यान दे कि एक डॉक्टर के नाम से केवल एक ही संस्थान पंजीकृत किया जाए।
  • डॉक्टर अपनी डिग्री बेचकर कहीं और रह रहे हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • पंजीकरण के बाद अस्पताल में डॉक्टर का नाम, डिग्री, पंजीकरण नंबर, बैठने का समय और फोन नंबर लिखा हो।
  • लिस्ट में 80 प्रतिशत ऐसे अस्पतालों के नाम हैं, जिसे झोलाछाप, एंबुलेंस ड्राइवर, प्रॉपर्टी डीलर और अन्य असामाजिक तत्व चला रहे हैं। ऐसे अस्पतालों की नियमित जांच की जाए कि आखिर कौन डॉक्टर बैठता है।
  • प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों का ऑपरेशन गांव और झोलाछाप के यहां हो रहा है। इसमें सुनिश्चित किया जाए कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक की फोटो जरूर ली जाए।

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि 153 डॉक्टर करीब 400 से अधिक अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनके नाम पर अस्पताल पंजीकृत हैं। झोलाछाप मरीजों को लेकर आने-जाने का काम करते हैं। अगर एक से अधिक डॉक्टर के नाम से अस्पताल का पंजीकरण है तो सभी झोलाछाप खुद ही सामने आ जाएंगे और उनकी दुकानदारी बंद हो जाएगी। मामले की जांच चल रही है।

 
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सीएमओ ने दी डॉक्टरों को चेतावनी

सीएमओ ने एक से ज्यादा नर्सिंग होम (अस्पतालों) में अपना पंजीकरण कराने वाले डॉक्टरों को नाम वापस लेने के लिए 15 दिन का समय दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि अगर 15 दिनों में आवेदन नहीं मिले तो स्वास्थ्य विभाग नर्सिंग होम से डॉक्टर का पंजीकरण निरस्त करेगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी करेगा। इस चेतावनी के बाद गत शनिवार को सीएमओ कार्यालय में सात डॉक्टरों ने दूसरे नर्सिंग होम से नाम वापस लेने के लिए आवेदन किया था।

इस वजह से है विवाद
भटहट के सत्यम नर्सिंग होम में डॉक्टर सुनील कुमार सरोज की ओर से किराये पर डिग्री दी गई थी। डिग्री देने के बाद इलाज एक झोलाछाप करता था। इस दौरान एक गर्भवती की जान चली गई थी। इस मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि 153 डाक्टर ऐसे हैं, जिनके नाम 355 नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर और क्लीनिक चल रहे हैं। सभी ने पूर्णकालिक के रूप में अपना पंजीकरण कराया है। किसी के नाम सात, तो किसी के नाम पर पांच-पांच अस्पताल पंजीकृत हैं। नियम के अनुसार एक डॉक्टर दो अस्पताल पर पंजीकरण करा सकता है। दोनों अस्पतालों की दूरी 30 किलोमीटर के अंदर होनी चाहिए।
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