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Gorakhpur News: डॉक्टर और झोलाछाप का गठजोड़, सांसत में मरीजों की जान

Wed, 08 Feb 2023 01:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 80 से अधिक अस्पताल सील किए जा चुके हैं। उन स्थानों पर अगर दूसरा अस्पताल खुला है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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गोरखपुर सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में अस्पतालों के पंजीकरण (लाइसेंस) में जबरदस्त खेल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग पहले उन्हीं अस्पतालों को पंजीकृत कर रहा है और बाद में कमियां दिखाकर सील कर रहा है। इसके बाद संचालक उसी भवन और स्थान पर नए नाम से अस्पतालों का पंजीकरण करा ले रहे हैं। ये केस इस बात की पुष्टि भी कर रहे हैं।

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इसके अलावा विभाग की जांच में भी यह बात सामने आ चुकी है कि अस्पतालों के पंजीकरण में खेल हुआ है। ऐसे अस्पतालों को लाइसेंस जारी कर दिया गया, जिनके डॉक्टर यहां रहते ही नहीं उनकी जगह पर झोलाछाप (बिना डिग्री वोल) इलाज करते हैं। इन्हीं झोलाछापों की वजह से मरीजों की जान जा ही रहीं है। साथ ही आर्थिक रूप से भी मरीजों और उनके तीमारदारों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद भी विभाग पंजीकरण के इस खेल को खत्म नहीं कर पा रहा है। इन अस्पताल संचालकों का जुगाड़ ऐसा है कि वह कभी भी और कही भी अस्पतालों का पंजीकरण करा ले रहे हैं।

किराए पर दे रहे हैं एमबीबीएस की डिग्री
किराये पर एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लेकर धड़ल्ले से फर्जी अस्पतालों का पंजीकरण किया जा रहा है। इसका खुलासा भी पुलिस की टीम ने किया है। सत्यम हॉस्पिटल का पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम पर था, संचालक उसे डेढ़ लाख रुपये देता था। इसके अलावा जो अस्पताल इस तरह से संचालित हो रहे हैं, वह साल में पांच से छह लाख रुपये डिग्री के नाम पर उॉक्टरों को दे रहे हैं। लेकिन, विभाग की नजर ऐसे अस्पतालों पर नहीं जाती। एक साल से शहर के बीच किसी अस्पताल की जांच नहीं हुई। जब भी जांच हुई है, शहर के बाहरी इलाकों में। जबकि, तारामंडल और पैडलेगंज का इलाका ऐसे अस्पतालों का हब बन गया है।
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35 डॉक्टरों ने दे दिया शपथपत्र

सत्यम हॉस्पिटल का मामला खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन के दबाव के बाद जब जांच शुरू की तो पता चला कि 153 डॉक्टर शहर के 400 अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे अस्पताल थे, जो काफी विवादों मे रहे हैं। इसके बाद 35 डॉक्टरों ने शपथपत्र दिया है कि वह केवल एक अस्पताल का संचालन भविष्य में करेंगे।

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 80 से अधिक अस्पताल सील किए जा चुके हैं। उन स्थानों पर अगर दूसरा अस्पताल खुला है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से चलने वाले अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टीम बनाई जाएगी।



 
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केस-एक

एक अस्पताल ने तीन बार बदला नाम
भटहट में लगभग तीन साल पहले चिराग अस्पताल खुला। संचालक कक्षा 12वीं पास है, लेकिन ऑपरेशन और इलाज वही करता है, जिस डॉक्टर के नाम से लाइसेंस है, वह कभी अस्पताल जाते ही नहीं। अस्पताल में नवजात की मौत के बाद उसे सील कर दिया गया। संचालक ने प्रियांशु नाम से अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराया और फिर वही धंधा शुरू हो गया। परिजनों ने फिर से शिकायत की तो अस्पताल सील हो गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से तीसरी बार सत्यम नाम से लाइसेंस जारी करा दिया। तीसरी बार फिर 12वीं पास संचालक अस्पताल में गर्भवती महिला का ऑपेरशन कर दिया। मरीज की मौत हो गई। अब अस्पताल सील है।
 

केस- दो

एक ही स्थान पर अस्पताल का संचालन, दो बार बदला नाम
पैडलेगंज में न्यू लोटस अस्पताल पहले खुला। अस्पताल में एक मरीज की मौत हुई और 200 रुपये का इंजेक्शन 3200 रुपये भी बेचते हुए मिला। एडीएम ने जांच की तो मामला सही पाया गया। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। सील होने के कुछ ही दिन बाद अस्पताल संचालक ने न्यू लोटस का नाम बदलकर सिटी हब कर दिया गया। इसी तरह खोराबार थाना क्षेत्र के कुसम्ही मोतीराम अड्डा मार्ग आयुष अस्पताल में एक बंगाली ने मरीज का ऑपरेशन कर दिया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में अस्पताल का संचालन दूसरे नाम से शुरू हो गया। अब उसका संचालन चंदन के नाम से किया जा रहा है।
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