सत्यम हॉस्पिटल का मामला खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन के दबाव के बाद जब जांच शुरू की तो पता चला कि 153 डॉक्टर शहर के 400 अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे अस्पताल थे, जो काफी विवादों मे रहे हैं। इसके बाद 35 डॉक्टरों ने शपथपत्र दिया है कि वह केवल एक अस्पताल का संचालन भविष्य में करेंगे।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 80 से अधिक अस्पताल सील किए जा चुके हैं। उन स्थानों पर अगर दूसरा अस्पताल खुला है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से चलने वाले अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टीम बनाई जाएगी।
केस-एक
एक अस्पताल ने तीन बार बदला नाम
भटहट में लगभग तीन साल पहले चिराग अस्पताल खुला। संचालक कक्षा 12वीं पास है, लेकिन ऑपरेशन और इलाज वही करता है, जिस डॉक्टर के नाम से लाइसेंस है, वह कभी अस्पताल जाते ही नहीं। अस्पताल में नवजात की मौत के बाद उसे सील कर दिया गया। संचालक ने प्रियांशु नाम से अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कराया और फिर वही धंधा शुरू हो गया। परिजनों ने फिर से शिकायत की तो अस्पताल सील हो गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से तीसरी बार सत्यम नाम से लाइसेंस जारी करा दिया। तीसरी बार फिर 12वीं पास संचालक अस्पताल में गर्भवती महिला का ऑपेरशन कर दिया। मरीज की मौत हो गई। अब अस्पताल सील है।
केस- दो
एक ही स्थान पर अस्पताल का संचालन, दो बार बदला नाम
पैडलेगंज में न्यू लोटस अस्पताल पहले खुला। अस्पताल में एक मरीज की मौत हुई और 200 रुपये का इंजेक्शन 3200 रुपये भी बेचते हुए मिला। एडीएम ने जांच की तो मामला सही पाया गया। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया। सील होने के कुछ ही दिन बाद अस्पताल संचालक ने न्यू लोटस का नाम बदलकर सिटी हब कर दिया गया। इसी तरह खोराबार थाना क्षेत्र के कुसम्ही मोतीराम अड्डा मार्ग आयुष अस्पताल में एक बंगाली ने मरीज का ऑपरेशन कर दिया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में अस्पताल का संचालन दूसरे नाम से शुरू हो गया। अब उसका संचालन चंदन के नाम से किया जा रहा है।