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Gorakhpur News: डीएम ने स्टिंग में वसूली पकड़ी, विवेचना में अफसर हो गए बेकसूर

Wed, 26 Apr 2023 01:49 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

विभाग में बिचौलियों की गहरी दखल पर नाम न छापने की शर्त पर रजिस्ट्री समेत कुछ अन्य विभागों के अधिकारी दलील देते हैं कि विभाग में कर्मचारियों की कमी है और काम अधिक है। इस संबंध में शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। जिले के आला अफसरों से भी समस्या साझा की गई है। हर उप निबंधक कार्यालय में रोजाना 100 से अधिक बैनामे होते हैं।
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तत्कालीन जिलाधिकारी विजय किरण आनंद। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रजिस्ट्री दफ्तर में जमीन की खरीद-फरोख्त में वसूली होती थी, होती है, यह बात सोलह आना सच है, लेकिन यह रुकेगी कैसे? यह एक बड़ा सवाल है। डीएम रहे विजय किरण आनंद ने आठ अप्रैल 2022 को गोपनीय जांच कराई। तब जांच में सामने आया था कि हर रजिस्ट्री कराने वाले से जमीन की सरकारी कीमत का एक से डेढ़ फीसदी तक कमीशन लिया जाता और न देने पर रजिस्ट्री में जानबूझ कर आपत्ति लगा दी जाती है।

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वीडियो व ऑडियो रिकॉर्डिंग से पुष्टि के बाद दस अप्रैल 2022 को कैंट थाने में तत्कालीन तहसीलदार विरेंद्र कुमार गुप्ता ने केस दर्ज कराया। जांच भी हुई, लेकिन अफसरों का तबादला हुआ और फिर चिट्ठी का खेल शुरू हो गया। तहसीलदार बुलाने पर नहीं आए और फिर उनके बयान के आधार पर सिर्फ बिचौलियों को ही गिरफ्तारी हुई और उनके खिलाफ ही आरोपपत्र 11 जुलाई 2023 को दाखिल कर दिया गया। अफसर बेकसूर साबित हो गए।

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भ्रष्टाचार के मुकदमे में पीडब्ल्यूडी के सरकारी बंगले से गिरफ्तार हुए विजय मिश्रा और अशोक उपाध्याय ही नहीं, बल्कि जिले की सभी तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में कई बिचौलिए सक्रिय रहते हैं, जो बिना स्थायी-अस्थायी नियुक्ति और मानदेय के काम करते हैं। इनकी दखल हर टेबल पर होती है। जमीनों के बैनामों में स्टांप कम तो नहीं जमा किया गया, इसके लिए स्पॉट निरीक्षण जैसी गंभीर प्रक्रिया भी ऐसे लोगों के जिम्मे है। कुछ तो ऐसे हैं जो अधिकारियों के घर सुबह-शाम खानसामे का काम करने के साथ दिन में रजिस्ट्री विभाग में सरकारी कर्मचारियों की तरह महत्वपूर्ण पटल के काम भी करते दिख जाते हैं।

दरअसल, स्टांप, बैनामा करने वाले क्रेता, विक्रेता, गवाहों की जांच समेत कई तरह की प्रक्रिया होती है। ऐसे में कुछ कर्मचारी चाय-पानी के नाम पर विभाग में रखे जाते हैं। हालांकि, इनसे महत्वपूर्ण काम नहीं लिया जाता है। सभी की निगरानी होती है। बैनामा के कागजात, स्पॉट निरीक्षण जैसे सभी अहम काम उप निबंधक और विभाग के स्थायी कर्मचारी ही करते हैं। ऐसे लोगों का यह भी दावा है कि सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों के रजिस्ट्री कार्यालय में भी बिना किसी मानदेय के बाहरी लोगों से काम लेने की प्रक्रिया आम है। जांच हो तो सब साफ हो जाएगा। हालांकि, संसाधनों की आड़ में गलत को सही बताने की दलील देकर अफसरों को भी गुमराह कर लिया जाता है।
 

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रजिस्ट्री विभाग के आला अफसरों पर भी उठे थे सवाल

कलेक्ट्रेट मुख्यालय परिसर स्थित सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय में भ्रष्टाचार के संबंध में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के आला अफसरों पर भी सवाल उठने लगे थे। उप निबंधक कार्यालय के ठीक ऊपर के तल पर डीआईजी स्टांप और एआईजी स्टांप का कार्यालय है। एक ही भवन में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा खेल सामने आने पर चर्चा आम हो गई थी कि आला अफसर किस तरह की निगरानी कर रहे थे?

जमीन के भू-प्रयोग के खेल में भी हेरफेर
आवासीय जमीन की भू-प्रवृत्ति छिपाकर उसे कृषि बताकर भी स्टांप ड्यूटी में गोलमाल किया जाता है। कई जगह की कृषि जमीन के आसपास आबादी विकसित हो जाने से उस पर स्टांप ड्यूटी आवासीय के मुताबिक निर्धारित की जाती है। रजिस्ट्री विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों में भी लेनदेन कर जमीन की रजिस्ट्री, कृषि दिखाकर कर दी जाती है। जमीन पर पेड़ लगे होते हैं, तो भी स्टांप ड्यूटी अधिक लगती है। यदि कच्चा मकान या चहारदीवारी है, तो भी स्टांप ड्यूटी की राशि बदल जाती है। मगर सूचनाएं छिपाकर इसमें हेरफेर कर दिया जाता है। बैनामा हो चुकी जमीनों के निरीक्षण में भी साठगांठ कर स्टांप ड्यूटी का खेल खेला जाता है।



इस तरह के बेतुके तर्क भी देते हैं
विभाग में बिचौलियों की गहरी दखल पर नाम न छापने की शर्त पर रजिस्ट्री समेत कुछ अन्य विभागों के अधिकारी दलील देते हैं कि विभाग में कर्मचारियों की कमी है और काम अधिक है। इस संबंध में शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। जिले के आला अफसरों से भी समस्या साझा की गई है। हर उप निबंधक कार्यालय में रोजाना 100 से अधिक बैनामे होते हैं।

यह हुआ था
डीएम विजय किरन आनंद की गोपनीय जांच में पुष्टि होने के बाद दस अप्रैल 2022 को कैंट थाने में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी, सरकारी पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में उप निबंधक केके तिवारी, जितेंद्र जायसवाल, राजेश्वर सिंह, विजय मिश्रा, अशोक व रजिस्ट्री कार्यालय के पटल लिपिक के खिलाफ केस दर्ज कर किया गया है। पुलिस ने आरोपी गुलरिहा के जंगल एकला नंबर दो के मूल निवासी विजय मिश्रा और देवरिया के मईल के मूल निवासी अशोक उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा बेलघाट निवासी व होमगार्ड अर्जुन को भी जेल भेजा गया था। विजय और अशोक की पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के बंगला नंबर 11 से गिरफ्तारी की थी। इसके बाद पुलिस ने जांच व साक्ष्यों के आधार पर अफसरों को दोषमुक्त करते हुए गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

सीओ कैंट  योगेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर काफी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। आरोपियों को जेल भी भेजा गया था।

 
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