कलेक्ट्रेट मुख्यालय परिसर स्थित सदर तहसील के उप निबंधक कार्यालय में भ्रष्टाचार के संबंध में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद विभाग के आला अफसरों पर भी सवाल उठने लगे थे। उप निबंधक कार्यालय के ठीक ऊपर के तल पर डीआईजी स्टांप और एआईजी स्टांप का कार्यालय है। एक ही भवन में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा खेल सामने आने पर चर्चा आम हो गई थी कि आला अफसर किस तरह की निगरानी कर रहे थे?
जमीन के भू-प्रयोग के खेल में भी हेरफेर
आवासीय जमीन की भू-प्रवृत्ति छिपाकर उसे कृषि बताकर भी स्टांप ड्यूटी में गोलमाल किया जाता है। कई जगह की कृषि जमीन के आसपास आबादी विकसित हो जाने से उस पर स्टांप ड्यूटी आवासीय के मुताबिक निर्धारित की जाती है। रजिस्ट्री विभाग के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक ऐसे मामलों में भी लेनदेन कर जमीन की रजिस्ट्री, कृषि दिखाकर कर दी जाती है। जमीन पर पेड़ लगे होते हैं, तो भी स्टांप ड्यूटी अधिक लगती है। यदि कच्चा मकान या चहारदीवारी है, तो भी स्टांप ड्यूटी की राशि बदल जाती है। मगर सूचनाएं छिपाकर इसमें हेरफेर कर दिया जाता है। बैनामा हो चुकी जमीनों के निरीक्षण में भी साठगांठ कर स्टांप ड्यूटी का खेल खेला जाता है।
इस तरह के बेतुके तर्क भी देते हैं
विभाग में बिचौलियों की गहरी दखल पर नाम न छापने की शर्त पर रजिस्ट्री समेत कुछ अन्य विभागों के अधिकारी दलील देते हैं कि विभाग में कर्मचारियों की कमी है और काम अधिक है। इस संबंध में शासन को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। जिले के आला अफसरों से भी समस्या साझा की गई है। हर उप निबंधक कार्यालय में रोजाना 100 से अधिक बैनामे होते हैं।
यह हुआ था
डीएम विजय किरन आनंद की गोपनीय जांच में पुष्टि होने के बाद दस अप्रैल 2022 को कैंट थाने में कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी, सरकारी पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में उप निबंधक केके तिवारी, जितेंद्र जायसवाल, राजेश्वर सिंह, विजय मिश्रा, अशोक व रजिस्ट्री कार्यालय के पटल लिपिक के खिलाफ केस दर्ज कर किया गया है। पुलिस ने आरोपी गुलरिहा के जंगल एकला नंबर दो के मूल निवासी विजय मिश्रा और देवरिया के मईल के मूल निवासी अशोक उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा बेलघाट निवासी व होमगार्ड अर्जुन को भी जेल भेजा गया था। विजय और अशोक की पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के बंगला नंबर 11 से गिरफ्तारी की थी। इसके बाद पुलिस ने जांच व साक्ष्यों के आधार पर अफसरों को दोषमुक्त करते हुए गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर काफी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। आरोपियों को जेल भी भेजा गया था।