फर्जीवाड़ा करने वाले विकिपीडिया का सहारा लेते हैं। प्रदेश महामंत्री इंजीनियर पीके मल्ल के मुताबिक, हियुवा की आधिकारिक वेबसाइट व ई-मेल आईडी को एडिट करके दूसरा विवरण लिख दिया जाता है। इससे तमाम लोग भ्रमित होकर फर्जीवाड़ा करने वालों के चंगुल में फंस जाते हैं। इसकी जानकारी संगठन को मिलती है।
विकिपीडिया की सूचना ठीक की जाती है, लेकिन कुछ समय बाद ही दोबारा एडिट करके गड़बड़ कर दी जाती है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रमित करने वाले हैं नौ हजार व्हाट्सएप ग्रुप
प्रदेश इकाई के मुताबिक हियुवा के नाम से देशभर में करीब 10 हजार व्हाट्सएप ग्रुप चल रहे हैं। इसमें से एक हजार ऐसे हैं, जो यूपी इकाई को फॉलो करते हैं। नौ हजार ग्रुप सिर्फ और सिर्फ भ्रमित करने के लिए बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य ठीक नहीं है। यह मामला जल्द ही पुलिस के संज्ञान में लाया जाएगा।
दूसरे राज्यों में संगठन खड़ा करने की मांग
हियुवा का दायरा बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, त्रिपुरा से फोन आते हैं। लोग कहते हैं कि वहां भी हियुवा का गठन होना चाहिए। प्रदेश महामंत्री इंजीनियर पीके मल्ल का कहना है कि अभी यूपी से बाहर काम करने का इरादा नहीं है। यूपी में संगठन की मजबूत पैठ है। दूसरे राज्यों से लोगों के फोन आते हैं। सब संगठन से जुड़कर काम करने को इच्छुक हैं।
कोई सदस्यता शुल्क नहीं
हियुवा उत्तर प्रदेश से जुड़ने का कोई शुल्क नहीं है। इसके संरक्षक गोरक्षपीठाधीश्वर व यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। यह संगठन पूरे यूपी में सक्रिय है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिला, तहसील, ब्लॉक, न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता काम कर रहे हैं।