जिला कोषागार के एक क्लर्क पर उसके ही कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पांच सदस्यीय वाह्य परिवाद कमेटी ने पूरी कर ली है। रिपोर्ट डीएम के मार्फत कोषागार के निदेशक को भेजी गई है। सूत्रों के मुताबिक, महिला कर्मचारी के आरोपों की पुष्टि हुई है। उधर, आरोपी क्लर्क 30 अक्तूबर को सेवानिवृत्त भी हो गया। ऐसे में अब उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
महिला कर्मचारी का आरोप है कि क्लर्क ने गंदे इशारे किए और फब्तियां कसीं, फिर हाथ पकड़ लिया। मना करने पर निलंबित कराने की धमकी दी। 23 जून को उन्हें निलंबन का आदेश भी पकड़ा दिया गया। महिला कर्मचारी का कहना है कि उसके पति पहले कोषागार में कार्यरत थे। वर्ष 2007 में उनका निधन हो गया और उनकी जगह उन्हें नौकरी मिल गई।
महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल से लिपिक की गलत निगाह उन पर थी। जब भी फाइल लेकर उनके पास जातीं तो वह गलत इशारे करता था। कार्यालय में जब भी कहीं अकेले में होती थीं, तो फब्तियां कसता था और अश्लील शब्दों का प्रयोग करके कार्यालय के बाहर अकेले मिलने के लिए भी कहता था। जबरदस्ती और धक्का-मुक्की की कोशिश करता था। कई बार तो हाथ भी पकड़ लिया।
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