उद्योगों को संचालित करने के लिए शासन के निर्देश के बाद जिला प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम के बाद अब गोरखपुर के उद्योगों के पहियों के घूमने की रफ्तार बढ़ने की संभावना बन गई है। उद्योगों में आने जाने के लिए आसानी से पास बन सकेगा। डीएम से मुलाकात के बाद उद्यमियों के मन में बनी हुई शंका भी काफी दूर हो गई है।
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बृहस्पतिवार को चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह, महासचिव प्रवीण मोदी, सह सचिव आकाश जालान और नाइन ग्रुप के अध्यक्ष अमर तुलस्यान ने डीएम के. विजयेंद्र पांडियन से मुलाकात की। इस दौरान डीएम ने उद्योगपतियों के मन की अधिकांश शंकाओं को दूर करने की कोशिश की।
दरअसल किसी भी उद्योग के संचालन के विभिन्न प्रावधान किए जाने के साथ ही उद्योगों के लिए आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 लागू किया गया है। इस कानून के तहत अगर किसी भी फैक्ट्री के संचालित होने के बाद उसमें कार्यरत कोई भी वर्कर कोरोना से संक्रमित होता है तो इसके लिए फैक्ट्री मालिक जिम्मेदार होगा और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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उद्योगों में किसी की भी तबीयत खराब हो, तत्काल करें सूचित
इसमें दो साल तक कैद और जुर्माना का भी प्रावधान है। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया कि डीएम ने उनकी कई शंकाओं का समाधान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए उपायों के प्रति फैक्ट्री संचालक सजग रहें और बेफिक्र होकर फैक्ट्री का संचालन करें।
उद्योगपतियों से वार्ता के दौरान डीएम ने उद्योगपतियों से कहा कि उद्योगों के संचालित होने से लेकर आगे भी कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर सभी को सजग रहना है। किसी भी वर्कर की तबीयत थोड़ी सी भी खराब होती है तो तत्काल उसकी सूचना संबंधित अधिकारी या सीएमओ को दें। फैक्ट्रियों को सैनिटाइज करने के बाद ही शुरू करें, फैक्ट्री के अंदर वर्करों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के साथ सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। उद्योगपतियों ने इस पर अपनी सहमति जताई।
हरेक फैक्ट्री में लगेगा थर्मल स्कैनर
आरएन सिंह ने बताया कि गीडा में जो भी फैक्ट्री शुरू होगी, सब में थर्मल स्कैनर लगाया जाएगा। इसकी खरीद के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही फैक्ट्रियों की इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
विशेष परिस्थितयों में ही बनाए जाएंगे वर्करों के लिए पास
गोरखपुर के उद्योगों को निर्वाध रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कई तरह की राहत देने के बाद गीडा प्रशासन और उपायुक्त उद्योग ने भी तैयारी शुरू कर दी है। फैक्ट्री संचालकों, वर्करों और गाड़ियों के उद्योगों तक आने जाने में किसी भी परेशानी से बचाने के लिए दो अलग अलग तरह के पास बनेंगे। फैक्ट्रियों के लिए जाने वाली गाड़ियों के लिए हरा तो फैक्ट्री संचालक और उनके वर्करों के लिए गुलाबी रंग का पास बनाया जाने लगा है। शुक्रवार से इन पासों का वितरण शुरू होगा।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने गीडा में संचालित उद्योगों के लिए गीडा सीईओ को और शहर के अन्य स्थानों पर संचालित उद्योगों के लिए पास जारी करने की जिम्मेदारी उपायुक्त उद्योग को दी है। इस निर्देश के बाद गीडा सीईओ ने बृहस्पतिवार को इसकी तैयारी शुरू कर दी। गीडा प्रशासन की कोशिश है कि फैक्ट्रियों को न्यूनतम श्रमिकों के साथ शुरू कराया जाए। वर्करों के लिए विशेष परिस्थितयों में ही पास बनाए जाएंगे। फैक्ट्रियों के बाहर लोगों का मूवमेंट कम से कम हो। जो भी फैक्ट्री शुरू हो, उसके कर्मचारी फैक्ट्री के अंदर ही रहें।
उद्योगपतियों ने डीएम को सौंपा पांच सूूत्री मांगपत्र
गीडा के सीईओ संजीव रंजन ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन के दिशा निर्देश का पालन कराते हुए फैक्ट्री निर्बाध रूप से चल सके, इसके लिए गीडा प्रशासन कोशिश में लगा हुआ है। बहुत विशेष परिस्थिति में ही श्रमिकों के लिए पास जारी किया जाएगा। इसके अलावा फैक्ट्रियों के संचालन के दौरान मानकों का पालन करना होगा। मानकों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर फैक्ट्रियों को सीज कर दिया जाएगा।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने डीएम को पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपकर अपनी शंकाएं जताई थी। इसके तहत फैक्ट्री संचालित होने के बाद कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर सीधे संचालकों को जिम्मेदार ठहराने, उद्योगों में काम करने वाले वर्करों के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट कराने, कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शासन के दिशा निर्देशों को पालन कराने की जांच के लिए प्रशासन की टीम गठित करने, संचालकों और टेक्टिकल स्टॉफ के लिए पास जारी करने और छोटे उद्योगों के लिए थर्मल स्कैनर से छूट देने की मांग की शामिल थी।