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कोरोना दहशत के बीच इस बीमारी की आ रही सबसे अधिक शिकायात, जानें क्या है पूरा मामला

Fri, 24 Apr 2020 12:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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केस-एक
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तिवारीपुर के निवासी 24 साल के शुभम फिलहाल चेन्नई में हैं। शुक्रवार को उसने मेडिवर डिजिटल हॉस्पिटल की ओर से जारी किए नंबर पर कॉल करके चेस्ट फिजिशियन डॉ. त्रिभुवन को बताया कि उसे रह-रह कर सीने में दर्द और सांस लेने में कभी-कभी दिक्कत होती है। शरीर गर्म रहता है और नींद भी नहीं आ रही है। इस पर डॉक्टर ने उसे कुछ दवा लिखते हुए कोरोना के भय से निपटने के उपाय बताए।

केस दो
गोरखपुर के भौवापार निवासी 32 साल के उमेश ने टेलीकांफ्रेसिंग के जरिए चेस्ट फिजिशियन डॉ. गोविंद को बताया कि उसे सांस लेने में पिछले कुछ दिनों से तकलीफ हो रही है। बुखार भी आ रहा है। लेकिन सर्दी और जुकाम नहीं है। इस पर डॉक्टर ने कुछ दवा लिखते हुए जिला अस्पताल में फ्लू कॉर्नर ओपीडी में जांच कराने की सलाह दी।
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ये दो केस महज बानगी हैं। ऐसे सैकड़ों फोन सांस फूलने की बीमारी वाले मरीज प्रतिदिन मेडिवर डिजिटल हॉस्पिटल की ओर से जारी किए गए दो नंबरों पर कॉल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 70 प्रतिशत फोन ऐसे मरीजों के आ रहे हैं जिनको सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

ऐसे मरीजों को तत्काल सलाह दी जा रही है कि वह जिला अस्पताल में जाकर अपनी जांच कराएं। क्योंकि सांस फूलने और सांस लेने की बीमारी से ग्रसित मरीज, डायलिसिस, निमोनिया के मरीजों की सूची तैयार करने का निर्देश पहले ही शासन की ओर से आ चुका है।  इन मरीजों की कोई ट्रेवेल हिस्ट्री हो या न हो, लेकिन इन मरीजों की जांच का फैसला शासन की ओर से लिया जा चुका है।
 
मेडिवर डिजिटल हॉस्पिटल के संचालक रामेश्वर मिश्र ने बताया कि इस वक्त करीब 70 प्रतिशत फोन ऐसे मरीजों के आ रहे हैं जिनको सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वह जिला अस्पताल में जाकर जांच कराएं। जबकि 30 प्रतिशत फोन में गर्भवती महिलाएं और चर्म रोग, हड्डी रोग और दंत रोग विशेषज्ञों के पास आ रहे हैं।
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कोरोना का खौफ लोगों के जेहन से नहीं निकल रहा

लॉकडाउन की वजह से लोगों के बीच कोरोना का खौफ लगातार बढ़ रहा है। इसके पीछे की वजह विशेषज्ञ सोशल मीडिया को बता रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि इस वक्त बीआरडी में इमरजेंसी में सैकड़ों मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनको एक ही समस्या है कि सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

ऐसे में उनकी कोरोना जांच कराई जाए। बताया कि इन मरीजों में कोरोना के कोई लक्षण भी नहीं मिले हैं। इसके बाद भी यह लोग डरे हुए हैं। अपील की है कि इस बीमारी से डरें नहीं बल्कि सफाई का विशेष ध्यान रखते हुए लॉकडाउन का पालन करें।

सांस की तकलीफ वाले मरीजों की कराई जा रही है जांच
बीआरडी और जिला अस्पताल में सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों की जांच कराने का फैसला जब से लिया गया है तब से लोगों में और डर बैठ गया है। यही वजह है कि ऐसे मरीज लगातार कॉल करके डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं।

बीआरडी में तो सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तक करा दिया जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया गया है कि सांस लेने में अगर किसी मरीज को परेशानी होती है तो उसकी कोरोना संक्रमण की जांच कराई जाएगी।
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