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Gorakhpur: आज से 40 दिनों तक झूलेलाल की भक्ति में लीन रहेंगे भक्त, धूमधाम से मनेगा महोत्सव

Sat, 16 Jul 2022 02:26 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

चालिहो पर्व के अंतिम नौ दिन नवरात्र के नाम से जाने जाते हैं, जिसमें श्रद्धालुओं की साधना गहन हो जाती है। वे मंदिरों में नौ दिन निवास कर भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
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भगवान झूलेलाल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना के महोत्सव के अंतर्गत मनाए जाने वाले 40 दिनों के चालिहो पर्व की शुरुआत शनिवार से हो रही है। इस बार गोरखनाथ रोड स्थित नवनिर्मित झूलेलाल मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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इस दौरान सिंधी समाज के लोग भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना में लीन रहेंगे। चालिहो पर्व के अंतिम नौ दिन नवरात्र के नाम से जाने जाते हैं, जिसमें श्रद्धालुओं की साधना गहन हो जाती है। वे मंदिरों में नौ दिन निवास कर भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। 41वें दिन 25 के अगस्त को भगवान झूलेलाल का महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

चालिहो महोत्सव का संबंध भगवान झूलेलाल के प्रकट होने से है। सिंध प्रांत में मिरख बादशाह के अत्याचारों से तंग आकर श्रद्धालुओं ने सिंधु नदी के किनारे 40 दिन तक भगवान वरुण की प्रार्थना की थी। 40वें दिन भगवान वरुण, झूलेलाल के रूप में प्रकट हुए थे। इसी उपलक्ष्य में सिंधी समाज 16 जुलाई से 24 अगस्त तक चालिहो महोत्सव मनाता है। इस दौरान श्रद्धालु पूजा प्रार्थना से आत्मशुद्धि का प्रयास करते हैं।
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भगवान झूलेलाल ने किया मिरख बादशाह का अंत

नगर सिंधी पंचायत के महामंत्री देवा केशवानी के अनुसार, श्रद्धालुओं की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उडेरो लाल (वरुण देवता) मछली पर सवार हो सिंधु नदी में प्रकट हुए। भक्तों ने जयघोष किया ‘आयो लाल झूलेलाल’। वरुण देवता ने कहा कि चिंता न करो, मैं रतन राय के घर चैत्र शुक्ल जन्म लूंगा और तुम्हारे दुखों का अंत करूंगा।

सन 951 में सिंध प्रांत के नसरपुर नगर में रतन राय के घर चैत्र शुक्ल द्वितीया को एक बालक का जन्म हुआ, इसलिए उन्हें चेट्रीचंड्र (चैत्र का चांद) कहते हैं। उनका नाम उदय चंद्र रखा गया। बड़े होने पर वह घोड़े पर सवार होकर मिरख बादशाह के पास गए, उसे समझाया, लेकिन फौज व धन के घमंड में वह नहीं समझा। अंतत: उदय चंद्र ने उसका वध कर दिया।

बैठक में तय हुई कार्यक्रम की रूपरेखा

लक्ष्मी सत्संग भवन जटाशंकर पर सिंधी समाज की एक बैठक हुई।  पूज्य झूलेलाल सेवा मंडल गोरखनाथ के उपाध्यक्ष हरीश करमचंदानी ने बताया कि गोरखनाथ स्थित श्री झूलेलाल नवनिर्मित मंदिर पर 16 जुलाई को अखंड ज्योत व पूज्य कलश की स्थापना प्रात: 10 बजे कर झूलेलाल चालिहो महोत्सव प्रारंभ किया जाएगा और प्रतिदिन प्रात: 7:00 से 8:00 तक और सायंकाल 8:00 से 9:00 तक आरती पूजा सत्संग भजन का आयोजन 25 अगस्त तक चलता रहेगा।

लक्ष्मी सत्संग भवन दरबार के साईं रविदास ने बताया कि लक्ष्मी सत्संग भवन जटाशंकर पर 16 जुलाई को प्रात: 11:00 बजे अखंड ज्योत व पूज्य कलश की स्थापना कर दी जाएगी। इसके बाद प्रतिदिन प्रात: 8:00 से 9:00 तक व सायं 7:00 से 8:00 तक आरती पूजा सत्संग भजन किया जाएगा। बैठक में नगर सिंधी पंचायत के महामंत्री देवा केशवानी, युवा सिंधी समाज के अध्यक्ष कमल मंझानी, समाजसेवी नंदलाल लखमानी, नरेश करमचंदानी, विक्की कुकरेजा, वासु पाहुजा, सूरज हिरवानी, ईश्वरदास लखमानी, अज्जी लखमानी, राजेश कृपलानी मौजूद रहे।
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