गोरखपुर। गुंबद गिरने से अधिवक्ताओं की मौत मामले में साथी अधिवक्ताओं का आरोप है कि हादसे के बाद एंबुलेंस के लिए कॉल करते रहे लेकिन नहीं पहुंची। इसके बाद पिकअप और ई-रिक्शा से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। आरोप है कि यहां से मेडिकल कॉलेज लेकर जाने के लिए भी एंबुलेंस का 40 मिनट से अधिक इंतजार करना पड़ा। इसी के बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।
राजघाट पर हादसे की सूचना के बाद अधिवक्ता तत्काल जिला अस्पताल पहुंचे। एंबुलेंस आने में देरी पर उन्होंने वहां विरोध किया। आलोक की मौत की सूचना मिलने के बाद जैसे ही एंबुलेंस शव लेकर आई तो परिजन और अधिवक्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर करीब आधे घंटे तक सड़क जाम रखा। करीब चार बजे एफआईआर की कॉपी मिलने के बाद हंगामा शांत हुआ। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ हंगामा करीब चार घंटे तक चला। बेतियाहाता पार्षद एडवोकेट विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा कि यदि समय से एंबुलेंस आ जाती तो आलोक की जान बच सकती थी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से जान गई है। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय, मंत्री अनुज अस्थाना, पूर्व अध्यक्ष भानू पांडेय, प्रकाशन मंत्री आशुतोष दुबे, गिरिजेश मणि, राहुल तिवारी, शक्ति श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
एंबुलेंस में देरी के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि एंबुलेंस पहुंचने में देरी के लगाए गए आरोपों की जांच कराई जा रही है। मामले की जांच के लिए एसीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें डिप्टी सीएमओ और डीपीएम शामिल हैं। एंबुलेंस की रिपोर्ट भी मांगी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।