कोरोना महामारी के बीच अवसाद (डिप्रेशन) की शिकार गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह है कि वे इलाज के लिए दवाओं का इस्तेमाल न करें। इससे मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों के स्वास्थ को खतरा है। बता दें कि इन दिनों गोरखपुर में प्रतिदिन आधा दर्जन के करीब गर्भवती महिलाएं अवसाद की शिकायत लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंच रहीं हैं।
कोरोना महामारी के दौरान गर्भवतियों के अवसादग्रस्त होने के काफी मामले सामने आ रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि कोरोना की वजह से गर्भवती अवसाद में हैं। ऐसे केस रोज आ रहे हैं। उन्हें अपने से ज्यादा चिंता होने वाले बच्चे की है। इतना ही नहीं जो बच्चे हो रहे हैं, तो प्रसूता उन्हें अपने से दूर रखने की कोशिश कर रहीं हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी वजह से बच्चा न संक्रमित हो जाए।
डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि छठे, सातवें, आठवें और नौवें महीने की गर्भवती कोरोना की वजह से ज्यादा तनाव ले रही हैं। उन्हें समझाया जा रहा है कि वह अवसाद के लिए दवा का इस्तेमाल न करें, नहीं तो उनके बच्चे और उन पर बुरा असर पड़ेगा।
बीआरडी के मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ तपस कुमार ने बताया कि प्रतिदिन ऐसे करीब आधा दर्जन केस आ रहे हैं। गर्भवती मानसिक तनाव से गुजर रहीं हैं। ऐसी गर्भवतियों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें समझाया जा रहा है कि एहतियात बरतकर, कोरोना से खुद के साथ बच्चे का भी बचाव किया जा सकता है। इसलिए दवा का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।