स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. अनीता गौतम ने बताया कि जांच से पहले भी हमने पार्षद के माध्यम से आसपास दवा छिड़काव की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल आई तो उनसे भी दवा छिड़काव कराने की मांग की गई। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। स्कूल में 360 बच्चियां पढ़ती हैं। हमने अपने स्तर से साफ-सफाई कराई है। अगर स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम की तरफ से फाॅगिंग करा दी जाए तो डर खत्म हो जाएगा।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी मुकेश रस्तोगी ने कहा कि नगर निगम की तरफ से 26 स्थानों को चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में सुबह शाम फॉगिंग करवाई जा रही है। कुछ मशीनों के खराब होने की शिकायत आई है। डेंगू के नियंत्रण और रोकथाम के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं।
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- अचानक तेज बुखार
- गंभीर सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द
- थकान
- जी मिचलाना, उल्टी-दस्त।
- त्वचा पर लाल चकत्ते, जो बुखार आने के दो से पांच दिन बाद दिखाई देते हैं
- हल्का रक्तस्राव (जैसे नाक से खून बहना, मसूड़ों से खून आना आदि)
ये हैं बचाव के उपाय
- त्वचा को खुला न छोड़ें, पूरी बाजू की शर्ट व फुल पैंट पहनें।
- डेंगू के मच्छर सुबह या शाम को अत्यधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए ऐसे समय में बाहर निकलने से बचने की कोशिश करें।
- मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी व अन्य उपाय जरूर अपनाएं।
- ठहरे हुए पानी को साफ करें। पानी के बर्तन या टंकी को हर समय ढककर रखें। बर्तन को उल्टा कर रखें, जिससे कि उसमें पानी इकट्ठा न हो।
जनरल फिजिशियन जिला अस्पताल डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि इस समय बुखार, वायरल फीवर के भी बहुत मामले आ रहे हैं। हर बुखार में डेंगू नहीं होता है। उमस भरी गर्मी व बारिश के इन दिनों में भोजन बहुत जल्दी खराब होता है। इसलिए ताजा पका खाना ही खाएं। फल-सब्जी लाएं तो उसे अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही प्रयोग में लाएं। सबसे जरूरी है कि घर व आसपास पानी रुकने न दें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। अपने मन से कोई दवा न लें।