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Gorakhpur: डेंगू के डेन-वन और टू स्टेन मरीजों को दे रहा ज्यादा दर्द, जिनोम सीक्वेंसिंग की जांच में खुलासा

Mon, 14 Nov 2022 01:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

आरएमआरसी की वायरोलॉजिस्ट डॉ हीरावती देवल ने बताया कि डेंगू के डेन-टू स्टेन 70 फीसदी मरीजों में मिले हैं। जबकि, 20 फीसदी मरीजों में डेन-वन, बाकी मरीजों में डेन-थ्री और फोर स्टेन मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक डेन-टू रहा है। यह वर्ष 2015-16, 19, 20 और 21 में भी मिल चुका है।
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डेंगू बुखार। - फोटो : istock
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में डेंगू एक बार फिर कहर बरपा रहा है। पूर्वांचल के हर जिलों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ज्यादातर मामलों में डेंगू के दो स्टेन सामने आ रहे हैं। इसे लेकर विशेषज्ञ भी हैरान हैं। क्योंकि, डेंगू के डेन-टू और थ्री मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इस साल 70 फीसदी मरीजों में डेंगू के डेन-टू और 20 फीसदी मरीजों में डेन-वन स्टेन मिले हैं।

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रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) की जीनोम सीक्वेसिंग की जांच में इसका खुलासा हुआ है। आरएमआरसी की टीम ने जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए जिले सहित बिहार के सिवान और छपरा के 380 मरीजों का सैंपल लिया था। इनमें डेंगू के चार स्टेन की पहचान हुई है। हालांकि, तीन और चार स्टेन के मरीजों की संख्या बेहद कम है।

आरएमआरसी की वायरोलॉजिस्ट डॉ हीरावती देवल ने बताया कि डेंगू के डेन-टू स्टेन 70 फीसदी मरीजों में मिले हैं। जबकि, 20 फीसदी मरीजों में डेन-वन, बाकी मरीजों में डेन-थ्री और फोर स्टेन मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक डेन-टू रहा है। यह वर्ष 2015-16, 19, 20 और 21 में भी मिल चुका है।
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यह स्टेन इतना खतरनाक है कि लगातार इसमें बदलाव हो रहा है। इसकी वजह से इस स्टेन के मरीजों के अंदर प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर मिल रही है। इस स्टेन के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ रही है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि जिले में इस स्टेन के मरीजों की संख्या काफी कम है। बिहार के गोपालगंज, सिवान और छपरा के मरीजों में यह स्टेन ज्यादा पाया गया है। इसकी वजह यह है कि मौसम में बदलाव के कारण यह ज्यादा आक्रामक हो गए हैं।  
 

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बदल रहे मौसम में डेंगू मच्छरों की ब्रीडिंग ज्यादा

जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि बदल रहे मौसम की वजह से डेंगू मच्छरों की संख्या बढ़ती जा रही है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, वैसे-वैसे डेंगू मच्छरों की ब्रीडिंग ज्यादा होती है। क्योंकि, यह डेंगू मच्छरों के जाने का समय होता है। ऐसी स्थिति में वह अपने आप को जिंदा रखने के लिए ज्यादा लार्वा देते हैं और इस मौसम में आक्रामक होकर तेजी से डंक मारते हैं। यही कारण है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

सुबह और शाम नहीं काटेंगे डेंगू के मच्छर
डेंगू मच्छर सुबह और शाम के वक्त नहीं काटते हैं। क्योंकि, ठंड में वे सक्रिय नहीं होते हैं। यही कारण है कि दिन में काटते हैं। यह सिलसिला अभी 10 से 12 दिन तक और चलेगा। इसके बाद वे ठंड के मौसम में सर्वाइव नहीं कर पाएंगे। इसलिए इस मौसम में दिन में भी लोगों को पूरी बाह के कपड़े पहनने चाहिए।
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