बिजली निगम की लापरवाही से होने वाली मौतों पर अब पहले की तुलना में बढ़ाकर मुआवजा मिलेगा। 25 से 30 वर्ष की उम्र वालों की मौत यदि बिजली निगम की लापरवाही के चलते करंट लगने से हो जाती है तो उसके परिजनों को 7.49 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलेगा। पशुओं की करंट से हुई मौत के मामले में मुआवजा की राशि लगभग दोगुनी कर दी गई है।
नये नियम के तहत अब बिजली निगम ने लापरवाही से हुई मौतों पर अफसरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। मुआवजे को भी 30 दिनों में ही देना होगा। अभी तक इसके लिए समय सीमा 45 दिनों की थी। करंट से 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चे की स्थायी दिव्यांगता पर सात लाख 95 हजार रुपये मुआवजे में दिए जाएंगे। करंट लगने से हुई मौत में यदि बिजली निगम की गलती नहीं है तो मृत्यु होने पर एक लाख, स्थायी दिव्यांगता पर 1.25 लाख रुपये दिए जाएंगे। गंभीर चोट पर तीन हजार और हल्की चोट पर दो हजार रुपये मिलेंगे।
किसी बच्चे या व्यक्ति की मौत 11 हजार वोल्ट की लाइन और ट्रांसफार्मर से होती है तो लाइनमैन व अवर अभियंता की जिम्मेदारी तय होगी। 33 केवी उपकेंद्र में मौत पर उपकेंद्र के आपरेटर और अवर अभियंता को जिम्मेदार माना जाएगा। 33 हजार की लाइन से मौत का जिम्मेदार अवर अभियंता और उपखंड अधिकारी को माना गया है।
मुआवजे की राशि अफसरों और कर्मचारियों के वेतन से वसूली जाएगी। इसके अलावा पशुओं जैसे, गाय व भैंस की मौत पर 30 हजार रुपये मिलेंगे। इसके अलावा भेड़ व बकरी की मौत पर मुआवजा तीन हजार रुपये तक मिल सकता है। मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मुआवजे की राशि पहले से अधिक कर दी गई है। इसका निर्देश भी आ चुका है।
(मृतकों के परिजनों को मिलने वाली धनराशि)
उम्र रुपये
15 वर्ष उम्र तक 6.27 लाख
15 से 20 वर्ष तक 6.67 लाख
20 से 25 वर्ष तक 7.08 लाख
25 से 30 वर्ष तक 7.49 लाख
30 से 35 वर्ष तक 7.08 लाख
35 से 40 वर्ष तक 6.67 लाख
40 से 45 वर्ष तक 6.27 लाख
45 से 50 वर्ष तक 5.45 लाख
50 से 55 वर्ष तक 4.63 लाख
55 से 60 वर्ष तक 3.41 लाख
60 से 65 वर्ष तक 2.59 लाख
65 वर्ष से ऊपर 2.19 लाख