गोरखपुर में कोरोना से मौत होने पर वायरस के वैरिएंट का पता लगाया जाएगा। इसके लिए सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए भेजा जाएगा। बीआरडी मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग सात मृत संक्रमितों के नमूने भी ले लिए हैं। इनमें तीन मासूम और चार व्यक्ति शामिल हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के बाद ही यह जानकारी हो सकेगी कि आखिर कौन सा वैरिएंट इन मरीजों के लिए खतरनाक साबित हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, कोरोना की तीसरी लहर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 500 बेड के कोविड वार्ड में 10 संक्रमितों से अधिक की मौत हो चुकी है। सात मरीजों की मौत पिछले तीन दिनों के अंदर हुई है। इनमें तीन मासूम और दो बुजुर्ग भी शामिल हैं। इन सबके बीच अब तक यह जानकारी विशेषज्ञों को नहीं मिल पाई है कि आखिर वायरस के किस वैरिएंट ने इनके शरीर को नुकसान पहुंचाया है।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि पिछले दिनों पांच मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें केवल एक मरीज की रिपोर्ट मिली है। जबकि, दो मरीजों के नमूने खराब हो गए थे। इसके अलावा सात अन्य मरीजों के नमूने तीन दिनों के अंदर लिए गए हैं, जिसे जांच के लिए केजीएमयू लखनऊ भेजा जाएगा।
डेल्टा वैरिएंट से हुई थी एचआईवी पीड़ित संक्रमित किशोर की मौत
देवरिया के रहने वाले एचआईवी पीड़ित किशोर की मौत बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में पिछले साल छह दिसंबर को हुई थी। उसे तीन दिसंबर को कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। नौ दिसंबर को उसका नमूना जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए केजीएमयू भेजा गया था। जांच में वायरस के डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा दूसरी लहर में डेल्टा, डेल्टा प्लस और कप्पा वैरिएंट ने जमकर तबाही मचाई थी।