गोरखपुर जिले के गुलरिहा इलाके के सियारामपुर गांव में दुर्गा मंदिर के पास नवजात जिंदा बच्ची को फेंकने के मामले में केस तो दर्ज किया गया, लेकिन, कार्रवाई नहीं हो रही है। 10 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ हैं।
पुलिस अब तक इस मामले में जांच के नाम पर सिर्फ घटना के सात दिन बाद यानी 24 जनवरी को प्रत्यक्षदर्शियों का बयान ही दर्ज कर सकी है। इसके आगे पुलिस की जांच न तो बढ़ी है और न ही पुलिस की इसमें दिलचस्पी नजर आती है। पुलिस की इस कार्रवाई से गांव में आक्रोश का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, 18 जनवरी को सियारामपुर में नवजात बच्ची मिलने के बाद पुलिस पहुंची थी। मेडिकल चेकअप के बाद पुलिस ने उसे चाइल्ड लाइन भेज दिया था। 19 जनवरी को गांव की प्रधान चंदा निषाद ने केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस केस दर्ज नहीं कर रही थी। 21 जनवरी को एसएसपी के आदेश के बाद केस दर्ज किया गया था।
विवेचना सरहरी चौकी इंचार्ज शैलेंद्र कुमार शुक्ला को सौंपी गई है, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूरी ही की जा रही है। गांव में बच्ची को फेंका जाना ग्रामीणों को खटक रहा है और अपने स्तर से वे यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसी हरकत किसने की है? ग्रामीण फिक्रमंद है तो पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अब ऐसे में लगता यही है कि जब तक कोई आला अफसर हस्तक्षेप नहीं करेगा, तब तक पुलिस इसमें कार्रवाई नहीं करने वाली है।
प्रधान प्रतिनिधि हनुमान निषाद ने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। अब तक बच्ची के बारे में कोई जानकारी पुलिस हासिल नहीं कर सकी है। इसकी शिकायत एसएसपी सहित अन्य आला अफसरों से करेंगे।
सरहरी चौकी प्रभारी (विवेचक) शैलेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि मामले की जांच जारी है। कुछ लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि प्रकरण में अब तक की गई जांच की पूरी जानकारी लेकर कार्रवाई कराई जाएगी।