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UP: संगीत की विरासत को आगे बढ़ा रहा DDU,बिरहा-चैता-फगुआ से पद्मश्री तक- 1958 से गढ़ रहा सुर

Sun, 21 Jun 2026 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

वर्ष 1958 में स्थापित डीडीयू के ललित कला एवं संगीत विभाग ने गोरखपुर को कई बार गर्व के पल दिए। विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. राजेश्वर आचार्य को शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2019 में पद्मश्री मिला तो उससे नया मुकाम मिला। विश्वविद्यालय के छात्र रहे विपिन पटवा बॉलीवुड के प्रसिद्ध संगीत निदेशक के रूप में देश में चमक बिखेर रहे हैं।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय( सांकेतिक) - फोटो : डीडीयू सोशल मीडिया पेज
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विस्तार
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बिरहा, भोजपुरी, फगुआ व चैता जैसे लोक गायन व संगीत की विभिन्न विधाओं में जनपद का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। वर्तमान दौर के कलाकार उस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का ललित कला एवं संगीत विभाग इसमें अहम भूमिका निभा रहा है।

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वर्ष 1958 में स्थापित डीडीयू के ललित कला एवं संगीत विभाग ने गोरखपुर को कई बार गर्व के पल दिए। विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. राजेश्वर आचार्य को शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2019 में पद्मश्री मिला तो उससे नया मुकाम मिला। विश्वविद्यालय के छात्र रहे विपिन पटवा बॉलीवुड के प्रसिद्ध संगीत निदेशक के रूप में देश में चमक बिखेर रहे हैं।

विभागाध्यक्ष व मशहूर सितार वादिका प्रो. उषा सिंह बताती हैं, गोरखपुर की मालिनी अवस्थी, पं. राम नारायण मणि त्रिपाठी 'सरसरंग', महेंद्र सिंह, सुरेंद्र मोहन मिश्र जैसे दिग्गजों ने संगीत को आगे बढ़ाया। विश्वविद्यालय से निकले कई विद्यार्थी शिक्षा के साथ ही स्वतंत्र कलाकार के रूप में योगदान दे रहे हैं।

मनोज तिवारी की संगीत जीवन की जड़ें भी गोरखपुर से गहरी जुड़ी हैं।

विराट है संगीत की विरासत की थाती
संगीत के क्षेत्र में विरासत की थाती बहुत विराट है। बिरहा गायक हीरालाल यादव ने कजरी 'कहवां से आवें राधा गोरी, बरसेला झिर-झिर बुनिया', लोकगायक मोहम्मद सलीम ने 'कवने खोतवा में लुकइलू आहि रे बालम चिरई', लोकगायक नियामत अली की 'नरई ताल के चिकन मटिया, जहां बसे पर्वत पहाड़ गोरिया', निर्गुण/पूर्बी गायक पं. राम नारायण मणि त्रिपाठी ने 'माया महाठगिनी हम जानी' लोक और फगुआ गायक साधु शरण दुबे ने 'धानी चुनरिया पहिन के गोरिया' जैसे अनेक गीतों को अपनी आवाज से अजर-अमर बना दिया। स्व. मैनावती देवी, स्व. आरडी वर्मा व उर्मिला शुक्ला आदि ने भी गीत-संगीत को नए आयाम दिए।

संगीत के क्षेत्र में बनाए दो विश्व रिकॉर्ड
सुगम और शास्त्रीय संगीत की कलाकार सुनिशा श्रीवास्तव के नाम दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड को ओएमजी-बुक से मान्यता मिली है। सुनिशा ने 28 सितंबर 2022 को लता मंगेशकर के जन्मदिन पर उनके 92 गाने 23 मिनट 27 सेकंड में गाया था।
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उससे पहले सात मार्च 2021 को दो साल की बच्ची से लेकर 85 साल की महिला तक (कुल 84) ने एक-एक कर क्रमबद्ध ढंग से स्टेज पर गाना गाया था। कुल 45 मिनट में यह पूरा हुआ था।

भोजपुरी लोकगायन को दिला रहे अंतरराष्ट्रीय पहचान
जनपद के कई गायक भोजपुरी लोकगायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं। इनमें राकेश श्रीवास्तव व राकेश उपाध्याय आदि शामिल हैं। सुगम संगीत की मिथिलेश तिवारी वर्तमान में उत्तर प्रदेश कथक एकेडमी की उपाध्यक्ष हैं। शरद मणि त्रिपाठी, राम दरश शर्मा, चेता सिंह, मनोज मिहिर, प्रभाकर शुक्ल, पारुल मिश्रा, प्रतिमा योगी, शिवदास चक्रवर्ती, बृजकिशोर तिवारी 'गुलाब', उमेश मिश्र व अवनेंद्र सिंह आदि संगीत की विभिन्न विधाओं को आयाम दे रहे हैं।
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