विभागाध्यक्ष व मशहूर सितार वादिका प्रो. उषा सिंह बताती हैं, गोरखपुर की मालिनी अवस्थी, पं. राम नारायण मणि त्रिपाठी 'सरसरंग', महेंद्र सिंह, सुरेंद्र मोहन मिश्र जैसे दिग्गजों ने संगीत को आगे बढ़ाया। विश्वविद्यालय से निकले कई विद्यार्थी शिक्षा के साथ ही स्वतंत्र कलाकार के रूप में योगदान दे रहे हैं।
मनोज तिवारी की संगीत जीवन की जड़ें भी गोरखपुर से गहरी जुड़ी हैं।
उससे पहले सात मार्च 2021 को दो साल की बच्ची से लेकर 85 साल की महिला तक (कुल 84) ने एक-एक कर क्रमबद्ध ढंग से स्टेज पर गाना गाया था। कुल 45 मिनट में यह पूरा हुआ था।
भोजपुरी लोकगायन को दिला रहे अंतरराष्ट्रीय पहचान
जनपद के कई गायक भोजपुरी लोकगायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं। इनमें राकेश श्रीवास्तव व राकेश उपाध्याय आदि शामिल हैं। सुगम संगीत की मिथिलेश तिवारी वर्तमान में उत्तर प्रदेश कथक एकेडमी की उपाध्यक्ष हैं। शरद मणि त्रिपाठी, राम दरश शर्मा, चेता सिंह, मनोज मिहिर, प्रभाकर शुक्ल, पारुल मिश्रा, प्रतिमा योगी, शिवदास चक्रवर्ती, बृजकिशोर तिवारी 'गुलाब', उमेश मिश्र व अवनेंद्र सिंह आदि संगीत की विभिन्न विधाओं को आयाम दे रहे हैं।