गोरखपुर। प्रख्यात भाषाविद व पद्मश्री प्रो. जीएन देवी ने कहा कि भाषा केवल मुख से संबद्ध नहीं बल्कि एक पूरी मानसिक प्रक्रिया है। आर्टिफिशल इंटेलीजेंस की भाषा वस्तुत: मानव बोलचार के लिए खतरा पैदा कर सकती है। एआई की भाषा दरअसल वर्चुअल है, जबकि ओरेलिटी रियल ह्यूमन लैंग्वेज से संबंधित है।
वह शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग और इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौखिक परंपराओं के प्रसार में आभासी माध्यम की भाषाएं एक बड़ी चुनौती हैं।
अध्यक्षता कर रहीं कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भाषा, मौखिक परंपरा और स्वदेशी साहित्य से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। विशिष्ट अतिथि हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने लोक संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ती शोध अध्ययन संभावनाओं एवं विश्वविद्यालयों में वर्तमान में चल रहे व्यापक कार्यक्रमों पर चर्चा की।
इस अवसर पर अतिथियों ने कार्यक्रम की स्मारिका का विमोचन किया। प्रो. जीएन देवी की अंग्रेजी पुस्तक ''महाभारत : द एपिक एंड द नेशन'' के हिन्दी अनुवाद ''महाभारत : महाकाव्य एवं राष्ट्र'' का भी लोकार्पण किया गया। इसका अनुवाद अंग्रेजी विभाग के पुरातन छात्र हरि प्रताप त्रिपाठी ने किया है। समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू व आभार ज्ञापन प्रो. गौर हरि बेहरा ने किया। संचालन डॉ. आमोद राय ने किया।