गोरखपुर विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय सेल भारतवंशियों विशेष रूप से गिरमिटिया देशों फिजी, सूरीनाम, गुयाना, मॉरीशस, त्रिनिदाद-और टोबैगो के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इन देशों के शिक्षण संस्थानों से एमओयू के लिए बातचीत की जा रही है। इन देशों में बड़ी संख्या में भारतवंशी अंग्रेजी शासन के दौरान गिरमिटिया मजदूर के रूप में गए थे, वे आज काफी प्रभावशाली हैं। वे भारत से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं भावनात्मक रूप से लगाव रखते हैं और भारत के शिक्षण संस्थानों से जुड़ना चाहते हैं।
रैंकिंग में विकासशील देशों की महत्वपूर्ण भूमिका
विश्वविद्यालय रैंकिंग जैसे एनआईआरएफ और क्यूएस रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए धारणा की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्यूएस रैंकिंग में करीब 50-60 प्रतिशत मूल्यांकन धारणा पर निर्भर करता है। इसमें विकासशील देशों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए इंटरनेशनल सेल विकासशील देशों के छात्रों/संकायों को आकर्षित करने के लिए एक विंडो खोलने के लिए अग्रसर है।
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