गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए अच्छी खबर है। अब कॉलेजों में गैर प्रायोगिक विषयो में सिर्फ दो शिक्षकों के साथ परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। कॉलेजों को राहत देने के लिए डीडीयू प्रशासन ने नियम में बदलाव का निर्णय लिया है।
संबद्ध कॉलेजों में परास्नातक पाठ्यक्रम के लिए प्रायोगिक और गैर प्रायोगिक विषयों के लिए तीन शिक्षकों की अनिवार्यता है। इस वजह से कई कॉलेज एमए और एमकॉम जैसे गैर प्रायोगिक कोर्स शुरू तो करना चाहते हैं लेकिन अनुमति नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में पीजी की पढ़ाई के लिए छात्रों को नजदीकी के बजाय कोर्स से संबंधित कॉलेज खोजना पड़ता है। डीडीयू प्रशासन के निर्णय से शहर से गांव तक के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
बताया जा रहा है कि तत्कालीन कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी के कार्यकाल में स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में परास्नातक के संचालन के लिए तीन-तीन शिक्षकों की नियुक्त का नियम बनाया गया था। कॉलेज प्रबंधन गैर प्रायोगिक विषयों में इस नियम से छूट को लेकर डीडीयू प्रशासन को मांगपत्र देते रहे लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने नियम में बदलाव कराकर कॉलेजों को राहत दी है।
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि गैर प्रायोगिक विषयों में दो शिक्षकों के साथ परास्नातक पाठ्यक्रमों के संचालन से कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू होंगे। इससे उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुंच आसान होगी।