समाज शास्त्र और शिक्षा शास्त्र में परास्नातक की शिक्षा लेने के बाद मुंबई आर्ट की। आर्ट और मेकअप आर्टिस्ट के बदौलत बॉलीवुड तक पहचान बनाई। वर्ष 2002 में मुंबई पहुंची और वहां कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
जिंदगी में कितने भी संघर्ष के दिन आएं, लेकिन बेटियां पीछे कदम नहीं हटाती हैं। 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर अमर उजाला ने बडहलगंज की कुछ ऐसी ही बेटियों की कहानियां आपके सामने पेश कर रहा है, जिन्होंने अपने संघर्ष के बूते सफलता के क्षितिज पर अचूक 'निशाना' साधा और कामयाबी की इबारत लिख डाली।
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समाज शास्त्र और शिक्षा शास्त्र में परास्नातक की शिक्षा लेने के बाद मुंबई आर्ट की। आर्ट और मेकअप आर्टिस्ट के बदौलत बॉलीवुड तक पहचान बनाई। वर्ष 2002 में मुंबई पहुंची और वहां कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। देश के मशहूर आर्टिस्टों से मेकप आर्टिस्ट की ट्रेनिंग ली। अब स्वयं मशहूर मेकअप आर्टिस्ट बनकर इलाके के लड़कियों को सपना मेकअप ट्रेनिंग सेंटर में स्वावलंबी बना रही हूं। अब तक क्षेत्र की 250 लड़कियों को इस क्षेत्र में काम करने के बाद सेल्फ डिपेंड बना चुकी हूं। जो अपना जीविकोपार्जन कर रही है। मुझे देश के कई मशहूर हस्तियों ने तमाम अवार्ड से सम्मानित भी किया है। बालिकाओं के विकास में शिक्षा काफी मायने रखता है। लड़कियां मेकअप आर्टिस्ट में अपना करियर चुन सेल्फ डिपेंड बन सकती है। 19 दिसंबर को मुक्तिपथ पर आयोजित सरयू अमृत महोत्सव में अपराजिता के क्षेत्र में सरयू रत्न से सम्मानित किया गया। - सपना यादव (दूर्गेश) मेकअप आर्टिस्ट कोडा़री, बड़हलगंज।
वर्ष 2017 में फैशन डिजाइनर कर इन दिनों दिल्ली के द्वारका में अपना उद्योग चला रही हूं। बालिकाओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है। शिक्षा के बाद करियर के साथ बेहतर गृहस्थ का निर्माण भी होगा। मुझे सरयू अमृत महोत्सव में फैशन डिजाइनर के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य के बूते सरयू रत्न से सम्मानित किया गया। -शैलवी त्रिपाठी मुजौना, बड़हलगंज।
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मैंने स्नातक और बीपीएड किया है। लड़कियों को खेल के क्षेत्र में मेहनत करना चाहिए, बेहतर भविष्य है। मैं ऑल इंडिया बेस पर कबड्डी में जूनियर वर्ग में केरल और सीनियर वर्ग में पानीपत और जयपुर में नेशनल खेल चुकी हूं। इसके अलावा खेलो इंडिया में पूणे में खेल चुकी हूं। हर क्षेत्र में बालिकाओं की भागीदारी से समाज का समुचित विकास होगा। महिलाओं के सम्मान से ही समाज की गरिमा बढ़ेगी। खेल के क्षेत्र में मुझे भी सरयू अमृत महोत्सव में सरयू रत्न से सम्मानित किया गया है। -प्रियम सिंह मकरंदपुर, बड़हलगंज।
एक कबड्डी खिलाड़ी के रूप में मैं ऑल इंडिया बेस पर सब जूनियर रोहतक और गुजरात के अलावा हैदराबाद में खेल चुकी हूं। मां संघ घर के सारे काम में मदद भी करती हूं। खेल के क्षेत्र में सरयू अमृत महोत्सव में मुझे सरयू रत्न से सम्मानित किया गया है। मैं स्नातक के अलावा बीपीएड की हूं। बहन, बेटी को अपनी बुद्धि व विवेक के साथ काम करने की स्वतंत्रता होना चाहिए।