ऐसे करते हैं जालसाजी
आमतौर पर गूगल पर लोग अस्पताल, दुकान या फिर जहां कहीं खरीदारी करनी होती है, गूगल पर सर्च करते है। इसी का फायदा जालसाज उठा रहे हैं और प्रतिष्ठान के अकाउंट के सजस्टेड एडिट ऑब्शन में जाकर उस पर मोबाइल नंबर डाल रहे हैं। ऐसे में कोई उत्पाद खरीदने या डॉक्टर के यहां नंबर लगवाने के लिए कोई फोन करता तो वह कॉल जालसाज के पास जाती है। जालसाज फोन पर उपभोक्ताओं को झांसे में लेकर ठगी करते हैं। इससे प्रतिष्ठान स्वामी को पता भी नहीं चलता है कि उनके फर्म के नाम पर ठगी हो रही है। जब पीड़ित फर्म पर पहुंचता है तो व्यापारी या डॉक्टर को इसकी जानकारी होती है।
गोरखपुर जिले में तीन लाख के करीब बिजनेस एकाउंट
साइबर पुलिस के मुताबिक, जिले में करीब तीन लाख लोगों के गूगल बिजनेस अकाउंट हैं। जालसाज चुनिंदा व्यापारियों को निशाना बनाकर जालसाजी कर रहे हैं और फिर उन्हें मालूम होने के बाद दूसरों को निशाना बना लेते हैं। साइबर पुलिस का कहना है कि यही वजह है पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही है। फर्म पर जाकर पुलिस अकाउंट को लॉक करा रही है। अकाउंट लॉक कर ही जालसाज से बचा जा सकता है।
केस एक
गोलघर स्थित एक बेकर्स के गूगल बिजनेस अकाउंट में जालसाज ने अपना मोबाइल नंबर डाल दिया। उसने आर्डर लेने के नाम पर रुपये गूगल पे करा लिया। जब आर्डर नहीं पहुंचा तो लोग शिकायत करने पहुंचे। कई दिन इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद व्यापारी ने 10 दिन पहले साइबर पुलिस को सूचना दी है। जांच में पता चला कि जालसाज ने नंबर अपना डाल दिया था। अकाउंट लॉक कर पुलिस जांच में जुटी है।
केस दो
बरगदवां स्थित एक नर्सिंग होम पर नंबर लगवाने के नाम पर जालसाजी हुई है। इसमें भी जालसाज ने ऐसा ही कुछ किया था। अस्पताल के गूगल बिजनेस अकाउंट पर किसी ने अपना मोबाइल नंबर लगा दिया और डॉक्टर के यहां नंबर लगाने के नाम पर लोगों को ठगता रहा। कई लोग नंबर लगाने का दावा कर पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधक को जानकारी हुई। अब शिकायत के आधार पर पुलिस जांच में जुटी है।
डीआईजी जे रविंद्र ने कहा कि इस तरह की जालसाजी के मामले सामने आए हैं। साइबर टीम रोजाना ही जागरूकता कार्यक्रम भी कर रही है। लोग अपने फेसबुक, जीमेल अकाउंट को सुरक्षित कर रहे हैं। ताकि, उनकी डिटेल व प्रोफाइल को कोई एडिट न कर सके। इसी तरह लोगों को गूगल बिजनेस अकाउंट को भी सुरक्षित करना होगा। अकाउंट लॉक नहीं होगा तो जालसाज रुपये की जालसाजी कर लेंगे। साथ ही फर्म की भी बदनामी होती है।