और जब पुलिस की धरपकड़ तेज हुई तो चकमा देने की बनी रणनीति
व्यापारी नेता पुष्पदंत जैन 1990 में विहिप का काम देख रहे थे। वे बताते हैं-लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद लोग जब विरोध प्रदर्शन करने लगे तो उनकी गिरफ्तारी होने लगी। जेल भर गई तो अस्थायी बनाए गए। मुझे याद है कि उस समय भाजपा विधायक शिवप्रताप शुक्ला और ओमप्रकाश पासवान की गिरफ्तारी के बाद कार्यकर्ताओं की धरपकड़ तेज हो गई। कोई अयोध्या न जाने पाए इस लिए गिरफ्तार कर लोगों को राप्तीनर बस डिपो के वर्कशाप में बने अस्थायी जेल में रखा गया।
उस समय महंत अवेद्यनाथ अयोध्या चले गए थे और महंत नवमीनाथ मंदिर का कार्यभार देख रहे थे। फिर पुलिस को चकमा देने की रणनीति बनी। तय हुआ कि कुछ लोग जेल जाने के लिए तैयार रहें और कुछ लोग किसी भी तरह अयोध्या पहुंचे। अस्थायी जेल को घेरने की रणनीति बनी ताकि वहां से साथियों को निकाला जा सके। हम लोग जेल की तरफ बढ़ रहे थे कि अयोध्या में गोली चल गई। शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। पुलिस ने सभी लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
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जब पैदल ही अयोध्या के लिए चल पड़े कारसेवक
अयोध्या में कारसेवा में भाग लेने के लिए जब पुलिस ने चारों तरफ के रास्ते सील कर दिए थे तब बड़हलगंज के बहुत सारे लोग पैदल ही चल पड़े थे। हिन्दू जागरण मंच के उपाध्यक्ष महेश उमर बताते हैं- उनके भाई सुरेश उमर बजरंग दल के बड़हलगंज नगर संयोजक थे। उनके नेतृत्व में टीम अयोध्या जाने के लिए निकली। लेकिन, हर जगह बैरिकेडिंग थी। फिर हम लोगों ने तय किया कि पैदल ही जाएंगे।
इसके बाद 18 लोग पैदल ही चल पड़े। कुई बाजार, कलवारी,घनघटा ,विक्रमजोत होते हुए फैजाबाद पहुंच गए। पुलिस से बचने के लिए हमने सरयू नदी के रास्ते अयोध्या पहुंचने की योजना बनाई। लेकिन, हमें नदी से पहले पुलिस ने पकड़ लिया और जेल भेज दिया।