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Ayodhya: कारसेवा में गिरफ्तार हुए थे हिमाचल के वर्तमान राज्यपाल, जेल गए तो और तेज हुआ नेटवर्क

Thu, 11 Jan 2024 02:42 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

अयोध्या में कारसेवा में भाग लेने के लिए जब पुलिस ने चारों तरफ के रास्ते सील कर दिए थे तब बड़हलगंज के बहुत सारे लोग पैदल ही चल पड़े थे। हिन्दू जागरण मंच के उपाध्यक्ष महेश उमर बताते हैं- उनके भाई सुरेश उमर बजरंग दल के बड़हलगंज नगर संयोजक थे। उनके नेतृत्व में टीम अयोध्या जाने के लिए निकली। लेकिन, हर जगह बैरिकेडिंग थी। फिर हम लोगों ने तय किया कि पैदल ही जाएंगे।
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हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बात 30 अक्तूबर 1990 की है। अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में कार सेवा के लिए जा रहे गोरखपुर के सौ से ज्यादा लोगों को बीच रास्ते से गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें तत्कालीन भाजपा विधायक एवं वर्तमान में हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, हिंदू महासभा के विधायक ओम प्रकाश पासवान को समर्थकों के साथ पुलिस ने नौसड़ चौराहे के पास रोक लिया। सभी को बेलीपार थाने पर बैठाया गया और फिर आजमगढ़ जेल भेज दिया। एक महीने जेल में रहे। इस दौरान कई जिलों से आए लोगों की मुलाकात हुई और इससे कारसेवकों का नेटवर्क और मजबूत हो गया।

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हिमाचल के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने दूरभाष पर अपनी स्मृतियां साझा करते हुए बताया-आज भी वह दौर याद कर शरीर में सिहरनसी होने लगती है। मुझे याद है पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली।

उनकी रथ यात्रा को 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या पहुंचनी थी। बिहार में लालू यादव की सरकार थी और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी से पूरे हिंदू जनमानस में उबाल आ गया। यह तय हुआ कि कारसेवा में गोरखपुर से हजारों की संख्या में कारसेवक जाएंगे।
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उन्होंने बताया- मेरे साथ सैकड़ों समर्थक अयोध्या जाने के लिए घर से निकले। इसी बीच मानीराम के विधायक ओमप्रकाश पासवान भी आ गए। हम लोगों का काफिला जैसे ही नौसड़ पहुंचा, वहां पर भारी पुलिस तैनात थी। हमारा रास्ता रोक लिया गया।

कहासुनी, धक्कामुक्की के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। वहां से पुलिस की सुरक्षा में बेलीपार थाने लाया गया फिर आजमगढ़ में केंद्रीय विद्यालय में बनाए गए अ्रस्थायी जेल में एक महीने तक रखा गया। उस समय जेल में बंद बहुत से साथी अब दुनिया में नहीं रहे।

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और जब पुलिस की धरपकड़ तेज हुई तो चकमा देने की बनी रणनीति
व्यापारी नेता पुष्पदंत जैन 1990 में विहिप का काम देख रहे थे। वे बताते हैं-लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद लोग जब विरोध प्रदर्शन करने लगे तो उनकी गिरफ्तारी होने लगी। जेल भर गई तो अस्थायी बनाए गए। मुझे याद है कि उस समय भाजपा विधायक शिवप्रताप शुक्ला और ओमप्रकाश पासवान की गिरफ्तारी के बाद कार्यकर्ताओं की धरपकड़ तेज हो गई। कोई अयोध्या न जाने पाए इस लिए गिरफ्तार कर लोगों को राप्तीनर बस डिपो के वर्कशाप में बने अस्थायी जेल में रखा गया।

उस समय महंत अवेद्यनाथ अयोध्या चले गए थे और महंत नवमीनाथ मंदिर का कार्यभार देख रहे थे। फिर पुलिस को चकमा देने की रणनीति बनी। तय हुआ कि कुछ लोग जेल जाने के लिए तैयार रहें और कुछ लोग किसी भी तरह अयोध्या पहुंचे। अस्थायी जेल को घेरने की रणनीति बनी ताकि वहां से साथियों को निकाला जा सके। हम लोग जेल की तरफ बढ़ रहे थे कि अयोध्या में गोली चल गई। शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। पुलिस ने सभी लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया।

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जब पैदल ही अयोध्या के लिए चल पड़े कारसेवक
अयोध्या में कारसेवा में भाग लेने के लिए जब पुलिस ने चारों तरफ के रास्ते सील कर दिए थे तब बड़हलगंज के बहुत सारे लोग पैदल ही चल पड़े थे। हिन्दू जागरण मंच के उपाध्यक्ष महेश उमर बताते हैं- उनके भाई सुरेश उमर बजरंग दल के बड़हलगंज नगर संयोजक थे। उनके नेतृत्व में टीम अयोध्या जाने के लिए निकली। लेकिन, हर जगह बैरिकेडिंग थी। फिर हम लोगों ने तय किया कि पैदल ही जाएंगे।

इसके बाद 18 लोग पैदल ही चल पड़े। कुई बाजार, कलवारी,घनघटा ,विक्रमजोत होते हुए फैजाबाद पहुंच गए। पुलिस से बचने के लिए हमने सरयू नदी के रास्ते अयोध्या पहुंचने की योजना बनाई। लेकिन, हमें नदी से पहले पुलिस ने पकड़ लिया और जेल भेज दिया।
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