शहर में नालों की लंबाई करीब 61 किलोमीटर है। राप्ती नदी में प्रतिदिन करीब 55 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी गिरता है। सबसे अधिक गंदगी सिविल लाइंस, कार्मल स्कूल, पुलिस लाइंस, धर्मशाला बाजार, जाफरा बाजार से इलाहीबाग तक जाने वाले नाले से होती है। इस नाले से 25 हजार से अधिक घरों का पानी राप्ती नदी में पहुंचता है।
डॉक्टर की राय
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि जलजनित बीमारियों से मेंजेटाइटिस, ट्रेकोमो (अंधापन), इंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। रामगढ़ताल और राप्ती नदी में यदि गंदा पानी गिर रहा है तो आसपास के लोगों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। संक्रामक बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है।
जलनिगम अधिशासी अभियंता रतनसेन सिंह ने कहा कि सीवर लाइन बिछाने का 70 फीसदी का पूरा हो गया है। जल्द ही इसे पूरा कराकर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाएगा। राप्ती व रोहिन नदी में गिरने वाले गंदे पानी को साफ करने की परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। इस काम को पूरा होने में तीन साल लगेंगे। शासन की प्राथमिकता के आधार पर इसे कराया जा रहा है।